देश को नेशनल वैक्सिन एजेंसी चाहिए अपूर्व भारद्वाज (घोर कलजुग,डाटावाणी) की कलम से

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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आज देश की सबसे ज्यादा जरूरत क्या है? आपके पास मर्ज है, उसकी दवाई भी पता है लेकिन दवाई उपलब्ध नही है, यह सब सरकार के मिसमैनेजमेंट से हुआ है। साहब 6 करोड़ वेक्सीन आप वेक्सीन डिप्लोमेसी के चलते दान कर चुके थे और अब कमी का रोना रो रहे है। तो चलिए आपकी एक बार सहायता कर देते है। यह पोस्ट कॉपी करके अपने पॉलिसी मेकर को भेज दीजिये, शायद हालत सुधर जाएं।
1.सबसे पहले निःशुल्क और 24*7 वेक्सीन शुरू कीजिए, पूरे देश मे एक महीने का नेशनल लॉकडाउन लगा कर सारे काम रोककर वेक्सीन लगाए. फंड की कमी का रोना मत रोइये, विस्टा प्रोजेक्ट जैसे फिजूल खर्ची को रोककर 20000 करोड़ इस काम पर लगाये.
2. अभी फिलहाल 7 करोड़/महीने वेक्सीन प्रोडक्शन की कैपिसिटी है। जब तक आप दूसरे वेक्सीन का प्रोक्योरमेंट करे, जितनी भी वेक्सीन उपलब्ध है उससे पहले जिन राज्यों में सबसे ज्यादा संक्रमण है उन्हें वेक्सीनेट करे।
3.अब उपलब्ध वेक्सीन को कैसे 7 दिन मेनेज करे वो भी समझा देते हैं। जो 25 लाख लोगों कोरोना हो गया है वो अगले 3 महीने तक सेफ है उन्हें छोड़ दीजिए। जो लोग 10 प्रतिशत एक डोज लगवा चुके है उन्हें भी 4 महीने तक स्किप करे, तो इससे आपके पास 7 दिन की व्यवस्था तो हो जाएगी।
4.वेक्सीन का मास प्रोडक्शन करे। सारी आइपी औऱ लायसेंस निरस्त करके यह काम 24 घँटे में शुरू कर दीजिए। विदेशी वेक्सीन निर्माता को दूसरी सारी वेक्सीन पर सब्सिडी दीजिये। उनको भारत का बड़ा दवा बाजार दिखा कर तत्काल वेक्सीन प्रोक्योरमेंट करे ।

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5.वेक्सीन उपलब्धता के बाद नया वेक्सीन सिस्टम बनाए। एक टास्क फोर्स बनाये जिसमे केवल डाक्टर और वैज्ञानिक शामिल हो। सारे तकनीक रजिस्ट्रेशन औऱ फार्मेलिटी बंद करके आधार बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम बनाये
6.वेक्सीन रेगिस्तान में पानी की तरह होना चाहिए, वेस्ट बिलकुल नही होना चाहिए। केरल का मॉडल अपनाए। एक वायल खराब होना भी अपराध माना जाए। वेस्टेज रेट 0.002 ही होना चाहिए जो अधिकारी औऱ सरकार इसका पालन न करे, उसके विरुद्ध सख्त करवाई की जाए ।
7.लास्ट बट नॉट लीस्ट, वेक्सीन का उत्सव जैसा नाटक न करे। जनता को रोज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सही आँकड़े बताए। पारदर्शिता और अनुशासन से यह सिस्टम बनेगा इसलिए जुमलेबाजी न करे, केवल काम पर फोकस करे ।
मुझे पता है कि मैं पिछले 1 साल से सरकार को सुझाव दे रहा हूँ, पता नही जिम्मेदार लोग पढ़ते है। मुझे पता है कि सिस्टम अंधा, गूंगा औऱ बहरा है लेकिन वो जिंदा तो है न। इसलिए आप सब यह बात अपने अपने नेताओं, अफसरों और जिम्मेदार लोगों तक पहुचाये। क्या पता हम सब के प्रयास से यह सिस्टम रूपी कुंभकर्ण नींद से जाग जाए।
इस पोस्ट को कॉपी करें या शेयर करे। और हां कोई क्रेडिट नही चाहिये, बस लोगो की जान बचना चाहिए, यह देश बचना चाहिए क्योंकि देश है तो हम है, देश ही नही तो कुछ भी नही ।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।