महापरिवर्तन 2026: सूर्य का उच्चासन और विश्व पटल पर शांति की नई सुबह की पहल के संकेत

अहंकार का नाश और सकारात्मक बोध

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sadbhawnapaati
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ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु) इंदौर

इंदौर । 14 अप्रैल 2026, प्रातः 09:36 बजे, ग्रहों के राजा सूर्यदेव अपनी उच्चतम अवस्था यानी मेष राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह मात्र एक गोचर नहीं, बल्कि दुनिया में एक बड़े और गुणात्मक बदलाव का संकेत है। सूर्य का यह पराक्रम एक ऐसी सकारात्मक समझ विकसित करेगा, जिससे विश्व युद्ध जैसी विनाशकारी विभीषिका को विराम देने या रोकने के लिए दुनिया भर के प्रमुख देश (राजा) गंभीर वैचारिक मंथन करने को विवश होंगे।

यह समय ग्रहों के योग से युद्ध की विभीषिका के समाधान की ‘सोच’ का समय है। सूर्य ग्रह अपने मित्र मंगल की राशि मेष और अश्वनी नक्षत्र में प्रवेश कर रहे हैं। अश्वनी नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह स्वयं सूर्य की राशि सिंह में अपने ही नक्षत्र में विराजमान हैं। ग्रहों की यह दुर्लभ स्थिति सत्ता के अहंकार और घमंड का नाश करेगी। यद्यपि विश्व में कुछ समय के लिए अस्थिरता, मानव प्राणियों में अविश्वास और असंतुष्टि का वातावरण रहेगा, लेकिन अंततः यह शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।

ग्रहों की चाल: राजाओं (राष्ट्राध्यक्षों) का ‘शांति-संवाद’

इस विश्लेषण का सबसे महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहलू सत्ताधीशों का व्यवहार है: – ऐतिहासिक शांति प्रयास: ग्रहों की चाल यह स्पष्ट दिखा रही है कि विश्व पटल पर जितने भी शासन अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष या प्रधानमंत्री (राजा) पद पर विराजमान हैं, वे सभी वर्तमान युद्ध ग्रस्त माहौल को ठीक करने का भगीरथ प्रयास करेंगे।

युद्ध रोकने की गंभीर पहल: ‘सूर्य’ यानी राजा, इस समय अपनी पूरी शक्ति और सकारात्मकता के साथ युद्ध न हो, ऐसी स्थितियां बनाने के लिए हाथ मिलाएंगे। कई देशों के राजा मिलकर शांति बहाली के लिए ऐतिहासिक पहल करेंगे।

भारत वर्ष की कुंडली और वैश्विक परिदृश्य

1. भारत के लिए शुभ संकेत (20 मई 2026 तक)
भारत वर्ष की वृषभ कुंडली में वर्तमान में मंगल में राहु का अंतर और प्रत्यन्तर गुरु ग्रह की दशा चल रही है। गुरु ग्रह अभी मिथुन राशि में मार्गी चलते हुए समस्त विश्व में अशुभ कर्मों का नाश करते हुए शुभ कर्मों की वृद्धि के लिए आगे बढ़ रहे हैं। भारत की ग्रहों की महादशा और गोचर के प्रभाव से 20 मई 2026 तक देश के अंदर शांति, अमन-चैन और सौहार्द स्थापित करने के समस्त सरकारी और सामाजिक प्रयास पूर्णतः सफल होंगे।

2. सावधानी का समय: वाणी पर संयम
वर्तमान समय में बुध, मंगल और शनि तीनों ग्रह मीन राशि में उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में विराजमान हैं। इस अशुभ युति के कारण पृथ्वी पर छोटी-छोटी बातों को लेकर आपसी बातचीत में विवाद होने की प्रबल संभावना रह सकती है। राष्ट्राध्यक्षों के बीच वैचारिक मतभेद उभर सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में कम बोलना या मौन रहना ही सबसे उत्तम नीति होगी।

3. आर्थिक अवस्था: अनिश्चितता का माहौल
विश्व बाजार के लिए ग्रहों का संकेत सुखद नहीं है।
तेजी: शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहेगा। सोना, चांदी और मेटल की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत हैं।
मंदी व महंगाई: एक्सपोर्ट-इंपोर्ट, तेल, डीजल और गैस की समस्याओं के कारण विश्व बाजारों का परिदृश्य ठीक नहीं रहेगा। महंगाई अपनी चरम सीमा की ओर होगी।
बड़े देशों की विफलता: अमेरिका अपने आर्थिक पहलुओं पर असफल हो जाएगा, जबकि रशिया अपना सोना बेचेगा।

सलाह: सावधानी से किया गया व्यापार और बचत से किया गया पैसा ही भविष्य में आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

4. राजनीतिक हलचल: नेतृत्व परिवर्तन
भारत वर्ष की राजनीति में बड़ा उतार-चढ़ाव रहेगा। कई राज्यों में मंत्रिमंडल गठन का नया स्वरूप नजर आएगा। विश्व के बड़े राष्ट्रों के अंदर नेतृत्व परिवर्तन (सत्ता पलट) के भी संकेत नजर आ रहे हैं। अमेरिका के लिए यह समय अत्यंत कठिन रहने वाला है।

5. स्वास्थ्य: वायरस और केमिकल का खतरा
विश्व युद्ध के अंतर्गत हुए विस्फोटक अग्निकांडों, हवाओं में घुले जहर और युद्ध में किए गए केमिकल (रासायनिक) उपयोग से नई बीमारियों और वायरस के जन्म लेने के संकेत नजर आ रहे हैं, जो विश्व स्वास्थ्य के लिए चुनौती बनेंगे।

निष्कर्ष: मौन, सहयोग और सकारात्कता ही जीत का मार्ग

आपात ग्रहों के वर्तमान परिवर्तन से ऐसा प्रतीत हो सकता है कि विश्व युद्ध को रोकने के सभी प्रयास असफल हो रहे हैं। ईरान, अमेरिका, इजरायल, रूस, यूक्रेन, चीन, ताइवान, भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान सहित अन्य राष्ट्रों में माहौल अस्थिर होने से शांति के प्रयास असफल होते हुए ‘नजर’ आ रहे हैं।

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