Christmas 20201 – कल है क्रिसमस: हैप्पी के बजाय क्यों बोला जाता है मैरी क्रिसमस, जाने 

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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क्रिसमस करीब आते ही आपके कानों को एक आवाज़ सुनाई देने लगेगी….मैरी क्रिसमस. लेकिन कभी आपने सोचा है कि हैप्पी होली, हैप्पी दिवाली और हैप्पी ईस्टर जैसे त्योहारों की तरह क्रिसमस के आगे हैप्पी क्रिसमस की जगह मैरी क्रिसमस क्यों लिखा जाता है?

मैरी और हैप्पी में अंतर

यदि  मैरी और हैप्पी शब्द के बीच अंतर की बात की जाये तो दोनों ही शब्दों को खुशी के इज़हार के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है. जानकारी के अनुसार 18वीं और 19वीं शताब्दी में लोग क्रिसमस विश करने के लिए एक-दूसरे को हैप्पी क्रिसमस ही कहा करते थे. इंग्लैंड में बहुत से लोग आज भी मैरी क्रिसमस की बजाए हैप्पी क्रिसमस कहकर ही विश किया करते हैं. इंग्लैंड के राजा जॉर्ज वी भी इसी शब्द का इस्तेमाल किया करते थे. इतना ही नहीं ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ भी मैरी से ज्यादा हैप्पी शब्द ही पसंद किया करती थीं. साथ ही ब्रिटेन के कई और उच्च वर्ग के लोग भी मैरी की जगह पर हैप्पी शब्द का ही इस्तेमाल किया करते थे. इसके बाजवूद भी आज लोग मैरी क्रिसमस लिखना-बोलना ही पसंद करते हैं. लेकिन कुछ जानकारों के अनुसार मैरी शब्द से लोगों की भावनाएं ज्यादा जुड़ी हुई हैं.

मैरी शब्द के पीछे है चार्ल्स डिकेंस का हाथ

मैरी शब्द के पीछे मशहूर साहित्यकार चार्ल्स डिकेंस का हाथ माना जाता है. कहा जाता है कि उन्होंने लगभग 175 साल पहले प्रकाशित अपनी किताब ‘अ क्रिसमस कैरोल’ के जरिए इस शब्द को प्रचलित किया था. हालांकि, क्रिसमस विश करते हुए अगर आप किसी को मैरी क्रिसमस की जगह पर हैप्पी क्रिसमस भी बोल देते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है.

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।