भारत में 60% बच्चे नहीं कर पा रहे ऑनलाइन क्लास, करीब 38% बच्चों ने स्कूल छोड़ा- सर्वे 

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
2 Min Read

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से किए गए इस सर्वे में सामने आया है कि 60 प्रतिशत बच्चे इंटरनेट का उपयोग न कर पाने की वजह से ऑनलाइन क्लास से दूर हैं।

कोरोना संक्रमण के कारण लगभग 18 महीने से स्कूल बंद हैं। इन स्कूलों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में एक रिपोर्ट ने इस व्यवस्था की कलई खोल कर रख दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में 60 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे इंटरनेट का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे में रिमोट विकल्प पर चल रहे स्कूलों और शिक्षा की वैकल्पिक व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से किए गए इस स्टडी में सामने आया है कि 60 प्रतिशत स्कूली बच्चे वर्चुअल कक्षाओं को सिर्फ इसलिए नहीं देख पा रहे हैं, क्योंकि उनके पास इंटरनेट की व्यवस्था नहीं हैं। एक और स्टडी में सामने आया है कि ग्रामीण ही नहीं शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में भी आधे से ज्यादा अभिभावकों ने इंटरनेट सिग्नल और स्पीड को लेकर शिकायत की। इसके अलावा मोबाइल डेटा को लेकर भारी भरकम खर्चा भी उनके लिए मुसीबत बना हुआ है।

सिर्फ 20 प्रतिशच बच्चे ही कर पा रहे ऑनलाइन क्लास
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ 20 प्रतिशत बच्चे ही ऐसे हैं, जो इस महामारी के दौर में पूरी तरह से ऑनलाइन क्लास कर पा रहे हैं। इनमें से भी सिर्फ आधे बच्चे ही लाइव क्लास में जुड़ पा रहे हैं।

बच्चों ने छोड़ा स्कूल
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंटरनेट की समस्या के कारण करीब 38 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया। सर्वे में कहा गया है कि 38 प्रतिशत अभिभावकों ने कहा कि ऑनलाइन क्लास सही तरीका नहीं है। इसमें बच्चा उस तरह से पढ़ और समझ नहीं रहा, जैसा कि ऑफलाइन क्लास में होता है।

Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।