Health tips – पुरुषों की अंदरुनी शक्ति बढाती है, प्लांट बेस्ड डाइट

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
3 Min Read

Health Tips. पुरुषों में यूरोलॉजिकल समस्याएं यानी पेशाब से संबंधित समस्याएं ज्यादा होती हैं. आमतौर पर 50 या 60 की उम्र के बाद पुरुषों में यूरोलॉजिकल समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती है. हालांकि अधिकांश बुजुर्ग इन समस्याओं पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, नतीजा उन्हें कई यूरोलॉजिकल बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इसके लिए बेहतर यही है कि शुरू से ही अपनी डाइट पर ध्यान दिया जाए. मेडिकल डायलॉग वेबसाइट के मुताबिक हाल ही में जर्नल ऑफ यूरोलॉजी (Journal of Urology) में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लांट बेस्ड डाइट यानी पौधों से प्राप्त फूड पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (प्रजनन अंग का शिथिल हो जाना) की समस्या को कम कर सकता है. पौधों से प्राप्त फूड पुरुषों की यूरोलॉजिकल हेल्थ के लिए भी बहुत फायदेमंद है.

20 से 70 साल के पुरुषों पर किया गया अध्ययन

अमेरिका में शोधकर्ताओं ने इस बात की पड़ताल के लिए पुरुषों पर एक अध्ययन किया जिसमें पाया गया कि पौधों से प्राप्त फूड का सेवन करने वालों को इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या बहुत कम हुई. इस अध्ययन में 20 से 70 साल के पुरुषों को शामिल किया गया था. इन लोगों को कई सवाल के जवाब देने के लिए कहा गया. मसलन पेशाब करने में किस तरह की दिक्कत हुई, उसके परिवार में किसी को यूरोलॉजी प्रॉब्लम है या नहीं, इरेक्टाइल डिसफंक्शन की कितनी शिकायतें हैं, प्रोस्टेट से संबंधित किस तरह की शिकायतें हैं, क्या प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करा रहे हैं, आदि. अध्ययन में 2549 पुरुषों को शामिल किया गया था.

28 प्रतिशत लोग इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या से परेशान

अध्ययन में पाया गया कि 1085 लोगों को इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी कोई समस्या नहीं हुई जबकि 1464 व्यक्तियों को कभी-कभी इरेक्टाइल डिसफंक्शन संबंधी परेशानियां आईं. वहीं मध्य आय़ु वर्ग के 28.8 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जिनमें इरेक्टाइल डिसफंक्शन की भारी समस्या थी. अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने प्लांट बेस्ड डाइट का जितना ज्यादा इस्तेमाल किया, वे इरेक्टाइल डिसफंक्शन की परेशानी से उतने ही दूर रहे जबकि मांसाहारी फूड का सेवन करने वाले अधिकांश लोग इस बीमारी की चपेट में थे.

Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।