आधुनिक प्रेम की क्रांति: ‘स्वाइप राइट’ से ‘नो स्ट्रिंग्स अटैच्ड’ तक का अनोखा सफर

सिचुएशनशिप से पॉलीअमोरी तक:आपका रिश्ता किस कैटेगरी में आता है? अभी चेक करें

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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दैनिक सदभावना पाती

आज का दौर प्यार को नए आयाम दे रहा है। जहां कभी रिश्ते जीवनभर की वफादारी और स्थिरता पर टिके होते थे, वहीं अब Gen Z और Millennials की दुनिया में प्यार ‘इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन’ और पर्सनल फ्रीडम का खेल बन गया है। डेटिंग ऐप्स, सोशल मीडिया और बदलते सामाजिक मानदंडों ने रिश्तों को पारंपरिक ढांचे से मुक्त कर दिया है। लेकिन क्या ये बदलाव हमें ज्यादा खुश कर रहे हैं या सिर्फ अकेलेपन की नई परतें जोड़ रहे हैं? यह आर्टिकल आधुनिक रिश्तों की उन अनोखी परतों को खोलता है, जहां भावनाएं, सुविधा और आजादी का मिश्रण है। हम मौजूदा प्रकारों को गहराई से देखेंगे और कुछ छूटे हुए ट्रेंड्स को भी शामिल करेंगे, जैसे ‘बेंचिंग’ और ‘लव बॉम्बिंग’, जो आज की डेटिंग कल्चर को और जटिल बनाते हैं।

1. सिचुएशनशिप (Situation-ship): नामहीन प्यार का जाल
आज की युवा पीढ़ी का सबसे पॉपुलर लेकिन कन्फ्यूजिंग ट्रेंड।

क्या है? दो लोग साथ घूमते-फिरते हैं, इंटीमेट होते हैं, लेकिन रिश्ते को कोई लेबल नहीं देते। “हम क्या हैं?” का सवाल हमेशा अनुत्तरित रहता है।
क्यों लोकप्रिय? कमिटमेंट का डर, आजादी की चाह और ‘बेटर ऑप्शन’ की तलाश। स्टडीज दिखाती हैं कि 70% युवा ऐसे रिश्तों में पड़ चुके हैं, लेकिन ज्यादातर में एक पार्टनर इमोशनली हर्ट होता है।
उदाहरण: कॉलेज फ्रेंड्स जो वीकेंड पर मिलते हैं, लेकिन फ्यूचर प्लान्स से दूर रहते हैं।

2. वन नाइट स्टैंड और हुकअप कल्चर (Fast-Food Dating): तात्कालिक संतुष्टि का दौर
शारीरिक आकर्षण पर आधारित, जहां भावनाएं बैकसीट पर होती हैं।

वन नाइट स्टैंड: एक रात का कनेक्शन, बिना किसी फॉलो-अप के। Tinder या Bumble जैसे ऐप्स ने इसे आसान बना दिया है।
हुकअप कल्चर: पार्टियों, क्लब्स या ऐप्स से शुरू होने वाले कैजुअल एनकाउंटर्स। यहां फोकस ‘फन’ पर है, न कि कमिटमेंट पर।
चुनौतियां: STI का रिस्क बढ़ता है, और अक्सर रिग्रेट फॉलो करता है। हाल की रिपोर्ट्स बताती हैं कि 40% युवा इसमें शामिल होते हैं, लेकिन 60% बाद में इमोशनल वॉइड महसूस करते हैं।

3. नीड-बेस्ड रिलेशनशिप (Need-Based Relationships): सुविधा का सौदा
व्यावहारिक लेकिन स्वार्थपूर्ण, जहां रिश्ता जरूरतों पर टिका होता है।

इमोशनल सपोर्ट: अकेलेपन से बचने के लिए पार्टनर, लेकिन कोई डीप बॉन्ड नहीं।
आर्थिक जरूरत: लक्जरी लाइफस्टाइल या फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए रिश्ता, जैसे ‘सुगर डेटिंग’ का एक रूप।
प्रोफेशनल ग्रोथ: नेटवर्किंग या करियर बूस्ट के लिए कनेक्शन, जहां पार्टनर का स्टेटस मायने रखता है।
कब खत्म? जरूरत पूरी होते ही रिश्ता डिस्पोजेबल हो जाता है। यह ट्रेंड शहरों में तेजी से बढ़ रहा है, जहां वर्क-लाइफ बैलेंस मुश्किल है।

4. फ्रेंड्स विद बेनिफिट्स (Friends with Benefits – FWB): दोस्ती प्लस इंटीमेसी
दोस्ती की बुनियाद पर शारीरिक संबंध, लेकिन “नो स्ट्रिंग्स अटैच्ड” का नियम।

कैसे काम करता है? फ्रेंड्स जो कैजुअल सेक्स में इन्वॉल्व होते हैं, बिना रोमांटिक एक्सपेक्टेशंस के।
समस्याएं: अक्सर एक साइड इमोशनली अटैच हो जाता है, जिससे दोस्ती टूट जाती है। मूवीज जैसे ‘No Strings Attached’ ने इसे पॉपुलर बनाया, लेकिन रियल लाइफ में 50% केसेज में यह फैल होता है।

ट्रेंड: महामारी के बाद यह बढ़ा, क्योंकि लोग सोशल आइसोलेशन से डील कर रहे थे।

5. ओपन रिलेशनशिप और पॉलीअमोरी (Open Relationships & Polyamory): मोनोगमी को चुनौती
पारंपरिक ‘एक पार्टनर’ के नियम को तोड़ने वाले ट्रेंड्स।

ओपन रिलेशनशिप: मुख्य पार्टनर के साथ रहते हुए दूसरों से फिजिकल या इमोशनल कनेक्शन की आजादी।
पॉलीअमोरी: एक से ज्यादा लोगों से सच्चा प्यार, ईमानदारी और कम्युनिकेशन पर आधारित। यह LGBTQ+ कम्युनिटी में ज्यादा कॉमन है।
क्यों बढ़ रहा? मोनोगमी को ‘अप्राकृतिक’ मानने वाले विचार। किताबें जैसे ‘The Ethical Slut’ ने इसे नॉर्मलाइज किया, लेकिन जलन और ट्रस्ट इश्यूज बड़ी समस्या हैं।

6. डिजिटल युग के नकारात्मक ट्रेंड्स: घोस्टिंग, ब्रेडक्रंबिंग और बेंचिंग
ऑनलाइन डेटिंग के साइड इफेक्ट्स जो रिश्तों को टॉक्सिक बनाते हैं।

घोस्टिंग: अचानक गायब हो जाना, बिना एक्सप्लेनेशन। यह ब्रेकअप का सबसे आसान लेकिन हर्टफुल तरीका है।
ब्रेडक्रंबिंग: छोटी-छोटी बातें करके उम्मीद जगाना, लेकिन कभी कमिट न करना। जैसे इंस्टाग्राम पर लाइक्स देना लेकिन मिलने से बचना।
बेंचिंग (नया ऐड): किसी को ‘बैकअप’ में रखना, मुख्य ऑप्शन फेल होने पर यूज करने के लिए। यह स्वार्थी है और दूसरे को इमोशनली ड्रेन करता है।
चुनौतियां: ये ट्रेंड्स मेंटल हेल्थ को प्रभावित करते हैं, जैसे एंग्जायटी और सेल्फ-डाउट।

7. लॉन्ग डिस्टेंस और वर्चुअल डेटिंग (Virtual Love): स्क्रीन के पार प्यार
टेक्नोलॉजी ने दूरियां मिटाई, लेकिन नई दीवारें खड़ी कीं।

क्या है? वीडियो कॉल्स, मेटावर्स या ऐप्स के जरिए रिश्ते, बिना फिजिकल मीटिंग के।
फायदे: ग्लोबल कनेक्शन, जैसे इंडिया से यूएस में पार्टनर।
नुकसान: टच की कमी से इंटीमेसी कम होती है, और ट्रस्ट इश्यूज बढ़ते हैं। पेंडेमिक ने इसे बूस्ट दिया, लेकिन 30% LDR फैल हो जाते हैं।

8. लव बॉम्बिंग और जॉम्बीइंग (Love Bombing & Zombieing): छूटे हुए टॉक्सिक ट्रेंड्स

लव बॉम्बिंग (नया ऐड): शुरू में ओवरवेल्मिंग प्यार दिखाना (गिफ्ट्स, कॉम्प्लिमेंट्स), लेकिन मैनिपुलेशन के लिए। बाद में कंट्रोलिंग बिहेवियर आता है।
जॉम्बीइंग (नया ऐड): घोस्टिंग के बाद अचानक वापस आना, जैसे ‘मिस यू’ मैसेज। यह कन्फ्यूजन पैदा करता है और ट्रस्ट ब्रेक करता है।
क्यों खतरनाक? ये नार्सिसिस्टिक बिहेवियर से जुड़े हैं, जो मेंटल हेल्थ को डैमेज करते हैं।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।