राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पर चल रहे भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2026’ के बाईसवें संस्करण में बेंगलुरु में असेंबल किए गए स्काईस्ट्राइकर लोइटरिंग म्यूनिशन ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में निर्धारित लक्ष्य पर सटीक प्रहार कर अपनी क्षमता का जीवंत प्रदर्शन किया। पाँच या दस किलोग्राम वारहेड लेकर लगभग सौ किलोमीटर तक पहुंचने वाला यह मानवरहित सिस्टम लक्ष्य का पता लगाने, मंडराने और फिर सटीक हमला करने की क्षमता रखता है। इसका इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम कम ध्वनि उत्पन्न करता है, जिससे यह गुप्त रूप से लक्ष्य के निकट पहुंच सकता है।
अभ्यास में दोनों देशों के करीब छह सौ-छह सौ सैनिक शामिल हैं। यह राजस्थान के मरुस्थलीय इलाके और उत्तराखंड के औली में पहाड़ी क्षेत्रों में एक साथ चल रहा है। इसमें इंटरऑपरेबिलिटी, आर्टिलरी समन्वय, काउंटर-ड्रोन रणनीति और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने महाजन रेंज का दौरा कर दोनों सेनाओं के संयुक्त प्रशिक्षण को मजबूत रक्षा साझेदारी का प्रतीक बताया।
स्काईस्ट्राइकर का यह प्रदर्शन भारत की बढ़ती ड्रोन क्षमता और मानवरहित प्रणालियों की भूमिका को सही रूप में प्रदर्शित करता है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में निर्णय लेने की गति निर्णायक होती है। लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे सिस्टम सैनिकों को दूर से लक्ष्य की निगरानी और समय-संवेदनशील प्रहार का विकल्प देते हैं, जिससे पारंपरिक आर्टिलरी पर निर्भरता कम होती है और जीवित रहने की क्षमता बढ़ती है।
यह अभ्यास न केवल तकनीकी साझा करने का मंच है, बल्कि दोनों देशों की साझा तैयारियों और विश्वास को भी मजबूत करता है। भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी और अमेरिका के साथ गहरी साझेदारी आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को प्रभावित करेगी। युद्ध अभ्यास-2026 ने साबित कर दिया कि मानवरहित प्रणालियाँ अब भविष्य के युद्ध की रीढ़ बन चुकी हैं।


