भारतीय सेना की रीढ़ मानी जाने वाली ‘रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी’ आज अपने गौरवशाली इतिहास का 200वां स्थापना दिवस मना रही है। 28 सितंबर 1827 को ‘5 (बॉम्बे) माउंटेन बैटरी’ के गठन के साथ शुरू हुआ यह सफर आज अत्याधुनिक सटीकता, प्रचंड मारक क्षमता और सामरिक उत्कृष्टता का पर्याय बन चुका है। ‘सर्वत्र इज्जत-ओ-इकबाल’ (हर जगह सम्मान और गौरव) के अमर ध्येय वाक्य को आत्मसात करते हुए तोपखाने के जांबाजों ने देश के हर प्रमुख युद्ध में अपनी निर्णायक भूमिका सिद्ध की है।
आर्टिलरी रेजिमेंट के इस ऐतिहासिक अवसर पर थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और दक्षिणी कमान के ले. जनरल राजेश पुष्कर सहित शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने सभी सेवारत तोपचियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। सेनाध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि आधुनिक मारक प्रणालियों से लैस आर्टिलरी रेजिमेंट आज युद्धभूमि में एक अजेय शक्ति बनी हुई है। वहीं, इस गौरवमयी अवसर पर भारतीय वायु सेना ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स से तोपखाने के सभी वीर जवानों को बधाई संदेश प्रेषित कर सशस्त्र बलों के बीच अटूट अंतर-सेवा तालमेल की मिसाल पेश की।
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में हैदराबाद में आयोजित 7,000 धावकों की ‘गनर्स सोल्जरथॉन’ और लुधियाना में वेटरन्स के सम्मेलन जैसे आयोजनों ने न केवल शारीरिक फिटनेस का संदेश दिया, बल्कि ‘वन्स ए सोल्जर, ऑलवेज ए सोल्जर’ की भावना को पुनः जीवंत किया।
पारंपरिक तोपों से शुरू होकर आज ड्रोन, मिसाइल प्रणालियों और निर्देशित सटीक हथियारों (Precision Guided Munitions) के युग में प्रवेश कर चुकी आर्टिलरी रेजिमेंट भारतीय सीमाओं की अभेद्य ढाल है। दो शताब्दियों का यह ऐतिहासिक मील का पत्थर भारतीय तोपखाने के अदम्य साहस, नवाचार और राष्ट्र रक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है।


