मंगलवार को सप्त शक्ति कमांड के रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलीकॉप्टरों ने राजस्थान के दंतौर के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग-911 के एक हिस्से को अस्थायी रनवे के रूप में इस्तेमाल किया। पाकिस्तान सीमा से सटे इस क्षेत्र में हुए इस अभ्यास ने सिद्ध किया कि पारंपरिक हवाई अड्डों की अनुपलब्धता की स्थिति में भी भारतीय सेना कितनी तेज़ी से अनुकूलन कर सकती है। सुरक्षा के लिए यातायात को अस्थायी रूप से रोका गया, ताकि दृष्टिकोण, लैंडिंग और टेक-ऑफ निर्बाध रूप से संपन्न हो सकें।
यह अभ्यास मात्र तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि रणनीतिक चिंतन का परिणाम है। पश्चिमी सीमा क्षेत्र में परिचालन तत्परता बढ़ाने के प्रयासों के अनुरूप, यह द्वैध-उपयोग अवसंरचना की उपयोगिता को रेखांकित करता है। राजमार्गों को अस्थायी हवाई पट्टी के रूप में प्रयोग करने की क्षमता संकटकाल में तीव्र प्रतिक्रिया, स्थितिजन्य जागरूकता और लचीलेपन को सुनिश्चित करती है। रुद्र जैसे सशस्त्र हेलीकॉप्टरों के साथ ध्रुव और चेतक का यह समन्वय वायु-सेना सहयोग की परिपक्वता को भी दर्शाता है।
सेना के अधिकारियों ने इसे परिचालन चपलता का प्रमाण बताया। वास्तव में, यह ‘मिशन रेडी, फ्यूचर रेडी’ की भावना का जीवंत उदाहरण है। आधुनिक युद्ध में पारंपरिक हवाई अड्डे प्राथमिक लक्ष्य बन सकते हैं। ऐसे में राजमार्गों, सड़कों और अन्य नागरिक अवसंरचना का सैन्य उपयोग शत्रु को आश्चर्य में डालने और अपनी गतिशीलता बनाए रखने का प्रभावी साधन है।
यह अभ्यास न केवल तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि मानसिकता का भी। अनुकूलन, नवाचार और रूपांतरण, इन तीन शब्दों में निहित संदेश स्पष्ट है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी तैयारियाँ शांति काल में ही युद्धकालीन आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। भारतीय सेना की यह पहल दर्शाती है कि वह पारंपरिक सीमाओं से आगे सोच रही है और भविष्य के चुनौतियों के लिए निरंतर स्वयं को तैयार कर रही है।


