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श्रावणी (उपकर्म) का भमोरी धाम में हुआ भव्य आयोजन

इंदौर। कल खत्म हुए सावन के अंतिम दिन मतलब श्रावण माह की पूर्णिमा पर भमोरी धाम स्थित श्री राम मंदिर में यज्ञोपवित का आयोजन किया गया ।
इसके बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए पंडित पूर्णानंद व्यास ने बताया कि, श्रावणी जो कर्म है वह सावन मास की पूर्णिमा के दिन किया जाता है, इसमें मां गायत्री की पूजा होती है, मंडल की स्थापना की जाती है और अनेक कई सारी पूजा होती हैं इसके बाद यज्ञोपवीत बदलने के लिए सभी ब्राह्मण अपने अपने नियम अनुसार जनेऊ लाकर सप्त ऋषि मंडल की पूजा अर्चना के बाद जनेऊ को बदला जाता है ।
गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित कर, सूर्य को दिखा कर फिर उसे गले में धारण किया जाता है, उसके बाद में पुरानी जनेऊ को विसर्जन करके हवन आदि करके मां गायत्री की आरती की जाती है ।तब ब्राह्मण यज्ञोपवीत को धारण कर लेते हैं।
प्रत्येक सावन की पूर्णमासी के दिन सभी ब्राह्मणों का नवीन यज्ञोपवित धारण करने का नियम वेद और शास्त्रों में कहा गया है ।
भमोरी धाम स्थित श्रीराम मंदिर में कल हुई पूजा में मुख्य रूप से चंद्र मोहन दुबे, डॉ भार्गव, तिवारी जी, अशोक कुमार दुबे, अंशुमान दुबे के अलावा अन्य दर्जनों ब्राह्मणों के साथ पाठशाला के शिष्य चाहत शर्मा, वैभव शर्मा, सोमेश शर्मा, संपूर्णानंद व्यास, रामकृष्ण व्यास, आदि सम्मिलित रहे। गुरुदेव पूर्णानंद व्यास द्वारा इस श्रावणी का आयोजन किया गया आचार्य के रूप में पंडित अखिलेश व्यास द्वारा पूजा करवाई गई ।
पंडित अखिलेश व्यास द्वारा बताया गया की इस पूजा में सभी ब्राह्मणों ने देश में शांति और सद्भावना हो इसकी प्रार्थना की, कोरोना जैसी कोई महामारी कभी हमारे देश में ना हो, साथ ही सभी के उत्तम स्वास्थ्य और देश की उन्नति के लिए प्रार्थना की गई ।
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