Health News – कोरोना सहित कई बीमारियों के लिए प्रभावी और सस्ती वैक्सीन बनेगी

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ब्रिटेन के रिसर्चर्स नई पद्धति का इस्तेमाल करते हुए कोविड-19 व अन्य बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन डेवलप कर रहे हैं.

नई पद्धति के जरिये एमआरएनए वैक्सीन का विकास तो जल्द होगा ही, साथ ही बड़े पैमाने पर उत्पादन तेज होने के कारण इनकी कीमत भी कम होगी. इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड में डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल एंड बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और इस स्टडी के चीफ रिसर्चर जोल्टन किस कहते हैं, ‘कोविड-19 वैक्सीन ने बताया है कि आरएनए तकनीक के इस्तेमाल से क्या कुछ संभव है. जिस वैक्सीन के विकास में वर्षो लगते थे, उसे अब कुछ महीनों में ही विकसित किया जा सकता है. इस तकनीक का इस्तेमाल दूसरी बीमारियों की वैक्सीन के विकास और उत्पादन के लिए किया जा सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘इसे और बेहतर बनाकर न सिर्फ मौजूदा बल्कि, भविष्य की महामारी संबंधी चुनौतियों से भी निपटा जा सकता है और इसे प्राप्त करने के लिए, हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि दुनिया भर के शोधकर्ताओं के पास अपने अनुसंधान, विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन कार्यक्रमों का समर्थन करने के लिए नवीनतम, अत्याधुनिक आरएनए निर्माण प्रक्रियाओं तक पहुंच हो.’

कैसे फायदेमंद होगी नई वैक्सीन

ये रिसर्च प्रोजेक्ट कोविड के नए वेरिएंट और दूसरी महामारियों के खिलाफ तेजी से नई वैक्सीन के विकास में मददगार साबित होगा. यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड ने एक बयान में बताया कि नई उत्पादन तकनीक आम दिनों में विकासकर्ताओं और निर्माताओं को उत्कृष्ट प्रक्रिया उपलब्ध कराएगी, ताकि कैंसर, मेटाबॉलिज्म संबंधी विकार, दिल और इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारियों के लिए भी वैक्सीन का विकास किया जा सके.

क्या कहते हैं जानकार

जोल्टन किस ने बताया, ‘हम वेलकम लीप R3 प्रोग्राम के माध्यम से फंडिंग प्राप्त करने के लिए आभारी हैं, और यह हमें शेफ़ील्ड विश्वविद्यालय में एक वैक्सीन उत्पादन प्रक्रिया स्थापित करके उन आरएनए निर्माण प्रक्रियाओं को विकसित करने और इनोवेशन करने की अनुमति देता है, जिसे बाद में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में स्थानांतरित किया जा सकता है. हम अधिक शोधकर्ताओं, डेवलपर्स और निर्माताओं को इस क्रांतिकारी आरएनए तकनीक का उपयोग करने में मदद कर सकते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘यह कोविड-19 और इसके प्रकार, मौसमी इन्फ्लूएंजा, रेबीज, जीका, ह्यूमन पैपिलोमावायरस, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया, एचआईवी, प्रतिरक्षा विकार और कैंसर जैसी बीमारियों की एक विस्तृत श्रृंखला के खिलाफ टीकों के तेजी से विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधा प्रदान करेगा. साथ ही वर्तमान और भविष्य में आने वाले वायरल लक्ष्यों के खिलाफ भी.’

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।