Health News – अध्ययन में खुलासा जानलेवा हो सकती है बहुत अधिक गुस्से की आदत, इन गंभीर बीमारियों का बढ़ता है खतरा

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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किसी चीज को लेकर नापसंदी या नाराजगी के जवाब में गुस्सा आना स्वाभाविक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस तरह की भावनात्मक अभिव्यक्ति को सामान्य भी मानते हैं, पर क्या आपको अक्सर बात-बात पर गुस्सा आता है?

इस तरह का गुस्सा जिसमें आप अपना आपा खो देते हैं या खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाते? ऐसी स्थिति को सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि गुस्सा आने की स्थिति में शरीर और मस्तिष्क में कुछ ऐसे बदलाव होते हैं जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

इन स्थितियों को जानलेवा माना जाता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

गुस्से के कारण बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा.
यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने स्ट्रोक के लिए गुस्से को मुख्य कारणों के रूप में व्यक्त किया है। स्ट्रोक पीड़ितों पर किए गए एक वैश्विक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि हर 11 में से एक स्ट्रोक पीड़ित रोगी में गुस्से की समस्या का निदान किया गया।
एनयूआई गॉलवे में क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजी के प्रोफेसर एंड्रयू स्मिथ कहते हैं, स्ट्रोक की रोकथाम के लिए उच्च रक्तचाप, मोटापा या धूम्रपान जैसे कारकों के साथ गुस्से की समस्या पर ध्यान देना भी आवश्यक है।
हार्ट अटैक का भी बढ़ जाता है जोखिम.
गुस्से के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर किए गए एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि क्रोधित होने के तुरंत बाद दो घंटों में, व्यक्ति में दिल का दौरा पड़ने का जोखिम लगभग पांच गुना और स्ट्रोक का जोखिम तीन गुना बढ़ जाता है।
जिन लोगों की मेडिकल कंडिशन स्ट्रोक और हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा देती है उनमें गुस्से के कारण इन समस्याओं का खतरा और भी अधिक हो सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?.
प्रोफेसर स्मिथ कहते हैं, हमारे अध्ययन में पाया गया कि अक्सर क्रोध और भावनात्मक समस्याओं से परेशान रहने वाले लोगों में स्ट्रोक के जोखिम में लगभग 30 प्रतिशत अधिक हो सकता है।
इसके अलावा बहुत अधिक शारीरिक परिश्रम करने वाले लोगों में स्ट्रोक का खतरा 60 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा महिलाओं में स्ट्रोक का जोखिक अधिक हो सकता है,
हालांकि जिनका बॉडी मास इंडेक्स कम है उनमें इसका खतरा कम देखा गया है।
एंगर मैनेजमेंट जरूरी.

गुस्से को नियंत्रित करने के लिए इन उपायों को भी फायदेमंद माना जाता है।

  1. उन कारणों को पहचानें जो गुस्से की भावना को बढ़ाती हैं, उनसे दूरी बनाने के प्रयास करें।
  2. उन बहस में पड़ने से बचें जो गुस्से का कारण बन सकते हैं।
  3. लंबी सांस लेने वाले अभ्यास करना फायदेमंद माना जाता है।
  4. गुस्सा आने पर तुरंत उस जगह से हट जाएं और पानी पिएं।
  5. योग-व्यायाम को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर गुस्से को कंट्रोल कर सकते हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।