ट्रंप ब्लॉक हो सकते हैं तो हिंदू देवताओं के खिलाफ पोस्ट करने वाले क्यों नहीं –  दिल्ली हाई कोर्ट

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
3 Min Read

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को ट्विटर के खिलाफ सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट से पूछा कि अगर डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट ब्लॉक हो सकता है तो हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ टिप्पणी करने वालों के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं हो रहा?
मामला एक ट्विटर अकाउंट से जुड़ा था, जिस पर हिंदू देवी के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की गई थी। हाई कोर्ट ने टि्वटर पर सवाल उठाया कि उसे अन्य क्षेत्रों के लोगों और उनकी भावनाओं की चिंता नहीं है.

ट्विटर को ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए

चीफ जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस नवीन चावला की बेंच एथिस्ट रिपब्लिक यूजर नेम द्वारा मां काली पर की गई पोस्ट के संबंध में सुनवाई कर रही थी। बेंच ने ट्विटर को निर्देश दिया कि कैसे वह बताएं कि कैसे कुछ लोगों को यहां पर ब्लॉक कर दिया गया है।

जबकि कुछ मामलों में दूसरे धर्म को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री होने के बावजूद एक्शन नहीं लिया गया। कोर्ट टि्वटर को और ज्यादा सावधान और संवेदनशील होने के लिए कहा।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जब अमेरिकी कंपनी ने दलील दी कि यूजर्स यहां पर किसी भी तरह की पोस्ट कर सकते हैं।

वह सभी अकाउंट्स को ब्लॉक नहीं कर सकती है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि फिर आपने ट्रंप का अकाउंट कैसे ब्लॉक कर दिया?

कोर्ट ने दिए ये निर्देश

कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्विटर का यह स्टैंड और यह कहना कि वह अकाउंट ब्लॉक नहीं कर सकता, पूरी तरह से ठीक नहीं है। टि्वटर की तरफ से पेश हुए सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि इस मामले में आपत्तिजनक पोस्ट हटाई जा चुकी है।

साथ ही एफआईआर भी दर्ज की गई है। वहीं सरकारी वकील हरीश वैद्यनाथ ने कहा कि जिस अकाउंट के खिलाफ शिकायत मिली है, उसे ब्लॉक करने की प्रक्रिया जारी है।

इसके बाद कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह मौजूदा केस में सामग्री को देखे और तय करें कि क्या आईटी एक्ट के तहत इस अकाउंट को ब्लॉक किया जाना चाहिए। वहीं कोर्ट ने ट्विटर, केंद्रीय सरकार और एथिस्ट रिपब्लिक को मामले में याचिकाकर्ता को जवाब पेश करने का निर्देश भी दिया

Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।