Indore News – मजदूर और किसान संगठनों के आह्वान पर भारत बचाओ दिवस के तहत बनी प्रभावी मानव श्रृंखला

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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*मोदी राज में किसान मजदूर की कमर टूटी, पूंजीपति प्रति मिनट करोड़ों कमा रहे

अखिल भारतीय संयुक्त अभियान समिति के आवाहन पर इंदौर के विभिन्न श्रम संगठनों और किसान संगठनों तथा कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त रूप से आज भारत बचाओ दिवस मनाया। इसके तहत मानव श्रृंखला और प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम संभाग आयुक्त को ज्ञापन दिया गया। संभाग आयुक्त कार्यालय के समक्ष प्रभावी मानव श्रृंखला बनी और बाद में संभाग आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन तथा सभा आयोजित हुई। मानव श्रृंखला और प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व सांसद कल्याण जैन, श्यामसुन्दर यादव, हरिओम सूर्यवंशी, अरुण चौहान रूद्रपाल यादव, रामस्वरूप मंत्री कैलाश लिंबू दिया, प्रमोद नामदेव आदि ने किया।
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से एटक, इंटक, सीटू, एचएमएस बीएसएनएल कर्मचारी यूनियन, मध्य प्रदेश बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन, बीमा कर्मचारी यूनियन, स्वाश्रयी महिला समिति सेवा, आंगनवाड़ी यूनियन एआईटीयूसी बीमा कर्मचारी यूनियन अखिल भारतीय किसान सभा, किसान संघर्ष समिति, इंजीनियरिंग मजदूर संगठन, मजदूर यूनियन सहित विभिन्न श्रम संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की मानव श्रृंखला और प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आशा उषा कार्यकर्ता और महिलाएं भी शामिल थी।
संभाग आयुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन कर मजदूर संहिता और काले कृषि कानून वापस लेने की मांग
मानव श्रृंखला के बाद कमिश्नर कार्यालय परिसर में हुई सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आई है तब से मजदूरों किसानों के खिलाफ लगातार कानून बनाए जा रहे हैं। किसान और मजदूर विरोधी कानूनों को लागू किए जाने से आम जनता का जीवन दूभर हो गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली संकट में है। कोरोना काल के चलते बेरोजगारी बढ़ रही है। अडानी और अंबानी की पूंजी लगातार बढ़ रही है। गैर बराबरी इतनी है कि अडानी और अंबानी प्रति मिनट एक करोड़ रूपया कमा रहे हैं जबकि आम मजदूर को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। पूंजीपतियों की तरफदार सरकार के चलते सभी वर्गों का जीना दूभर हो गया है। इसी के तहत आज देश भर में भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर भारत बचाओ आंदोलन की शुरुआत हुई है और इस आंदोलन के चलते निश्चित रूप से इस सरकार को या तो अपनी नीतियां बदलना पड़ेगी या फिर जाना होगा। सभा को सर्वश्री पूर्व सांसद कल्याण जैन, लक्ष्मी नारायण पाठक, अरुण चौहान, रामस्वरूप मंत्री, हरिओम सूर्यवंशी, कविता मालवीय, प्रमोद नामदेव ने संबोधित किया। ज्ञापन का वाचन और सभा का संचालन रूद्रपाल यादव ने किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम दिए गए ज्ञापन में मांग की गई है कि मजदूर विरोधी श्रम सहिता एवं किसान विरोधी तीनों काले कानून व बिजली संशोधन अध्यादेश वापस लिया जाए। किसानों को फसलों का समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जाए, पेट्रोल के डीजल सहित आम उपयोग की वस्तुओं में मूल्य वृद्धि पर रोक लगाई जाए, कोरोना लॉकडाउन के कारण वेतन वृद्धि पर लगी रोक हटाई जाए, सरकारी विभागों में खाली पदों पर तुरंत भर्ती की जाए, मनरेगा योजना के बजट में वृद्धि कर 200 दिन काम दीया जाकर 2600 प्रतिदिन वेतन दिया जाए सभी गैर आय करदाता परिवारों के खाते में साडे सात हजार मासिक तथा 10 किलो प्रति व्यक्ति राशन मुफ्त दिया जाए। देश के सभी नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन लगाना सुनिश्चित की जाए। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों बैंक, बीमा, बीएसएनएल, रेलवे के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। गौरतलब है कि आज देशभर के केंद्रीय श्रम संगठनों और किसान संगठनों ने भारत बचाओ दिवस का आवाहन किया था जिसके तहत देशभर में प्रदर्शन और विरोध दिवस मनाया गया इसी के तहत इंदौर में यह आयोजन हुआ था। मानव श्रृंखला और प्रदर्शन में प्रमुख रूप से हरिओम सूर्यवंशी, लक्ष्मी नारायण पाठक, रुद्रपाल यादव, सोहनलाल शिंदे, रामस्वरूप मंत्री अरविद्र पोरवाल, कविता मालवीय, भागीरथ कटवाए, सोनू शर्मा, सत्यनारायण वर्मा, कैलाश लिंबूदिया सीएल सरांवत, सुशीला यादव, कैलाश गोठा निया, यशवंत पैठणकर, राजेश सूर्यवंशी, माता प्रसाद मौर्य के के मारोतकर, अजय लागू सहित विभिन्न संगठनों के प्रमुख कार्यकताओं ने के भागीदारी की।
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।