टारगेट किलिंग से मजबूर कश्मीरी पंडित पलायन को मजबूर, सरकार से गुहार – हमें सुरक्षित जगह ले चलो

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sadbhawnapaati
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Sri Lanka's Army members stand guard at a Ceylon Petroleum Corporation fuel station to help stations distribute oil during the fuel crisis, in Colombo, Sri Lanka March 22, 2022. REUTERS/Dinuka Liyanawatte - RC2F7T9LZP2R

हवाई अड्डे से जारी बयान – हम सनसनीखेज अफवाह फैलाने वालों का जोरदार खंडन करते हैं

कश्मीरी पंडित बड़े पैमाने पर पलायन की तैयारी में जुट गए हैं। अनंतनाग के मट्टन में गुरुवार को आतंकी हमलों से डरे पंडित अपना सामान लेकर बनिहाल (जम्मू) जाने की कोशिश में लग गए हैं।

अनंतनाग के वैस्सू इलाके में भी कश्मीरी पंडित पलायन करने की तैयारी में हैं। पंडितों ने बताया कि वे सामान पैक कर चुके हैं, लेकिन सुरक्षाबलों के जवान कैंप से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं।

घाटी में लगातार हो रही वारदातों के बाद कश्मीरी पंडितों ने पलायन का अल्टीमेटम दिया था। कश्मीर में 19 दिन से पंडितों का प्रदर्शन चल रहा है।

हिंदू कर्मचारियों के ट्रांसफर का फैसला

जम्मू-कश्मीर में टारगेट किलिंग के बीच प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए हिंदू सरकारी कर्मचारियों का ट्रांसफर करने का फैसला किया है। हिंदू कर्मचारी मांग कर रहे थे कि उनका जम्मू में ट्रांसफर किया जाए, लेकिन फिलहाल प्रशासन ने उन्हें जिला मुख्यालय लाने की तैयारी की है।

रजनीबाला की हत्या पर प्रदर्शन जारी

कुलगाम में एक हिंदू शिक्षक रजनी बाला की हत्या पर विरोध प्रदर्शन जारी है। रजनी की अंतिम यात्रा के दौरान गुस्साए प्रदर्शनकारी बुधवार को भी सड़कों पर उतर आए थे और ‘हमें न्याय चाहिए’ के नारे लगाए।

मंगलवार सुबह कुलगाम के गोपालपोरा इलाके में हाई स्कूल टीचर रजनी बाला की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। 36 साल की रजनी को सिर में गोलियां लगी थीं। कुलगाम की रहने वाली टीचर ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया।

21 दिन में 6 टारगेट किलिंग

जम्मू-कश्मीर में पिछले 20 दिनों में 6 टारगेट किलिंग का मामला सामने आया है। 12 मई को बडगाम में राहुल भट्ट (सरकारी कर्मचारी), 13 मई को पुलवामा में रियाज अहमद ठाकोर (पुलिसकर्मी), 24 मई को सैफुल्लाह कादरी (कांस्टेबल), 25 मई को अमरीन भट्ट (टीवी आर्टिस्ट) और 31 मई को कुलगाम में रजनी बाला (टीचर) की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

1990 में हुआ था कश्मीरी पंडितों का सबसे बड़ा पलायन

1990 में घाटी से कश्मीरी पंडितों का सबसे बड़ा पलायन हुआ था। गृह मंत्रालय के मुताबिक 1990 में 219 कश्मीरी पंडित हमले में मारे गए थे, जिसके बाद पंडितों का पलायन शुरू हुआ। एक अनुमान के मुताबिक 1 लाख 20 हजार कश्मीरी पंडितों ने घाटी से उस समय पलायन किया था।

हवाई अड्डे ने तमाम अफवाहों का किया खंडन   

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर हवाई अड्डे की तरफ से उन तमाम अफवाहों का खंडन किया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि कश्मीरी पंडित समूहों ने 24 घंटे के भीतर घाटी छोड़ने का फैसला किया है.

हवाई अड्डे की तरफ से जारी बयान के मुताबिक – हम सनसनीखेज अफवाह फैलाने वालों का जोरदार खंडन करते हैं. एयरपोर्ट के बयान के मुताबिक – हम हर रोज 16,000 से 18,000 यात्रियों को संभालते हैं. आज भी यात्रियों की संख्या औसत है. अल्पसंख्यक समुदाय की कोई भारी भीड़ नहीं है.

 

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