सुन लो भ्रष्ट अधिकारी और नेताओं यह न्याय की देवी मां अहिल्या का शहर है

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sadbhawnapaati
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इंदौर शहर न्याय की देवी मां अहिल्या का शहर है। मां अहिल्या ने न्याय के खातिर अपने ही पुत्र को रथ से कुचलवाने का आदेश दे दिया था। इसी शहर ने बड़े राजनीतिज्ञ पीसी सेठी, सुरेश सेठ, महेश जोशी जैसे का रसूख बनते और बिगड़ते देखा, यही वह शहर है जिसने कालू भाट, बाला बैग, विष्णु उस्ताद जैसे बाहुबलीयों का रुतबा बनते और बिगड़ते देखा। मां अहिल्या की नगरी में अनेक व्यापारियों के पैसे के घमंड को चकना चूर होते देखा। जहां यह सत्य है कि माता अन्नपूर्णा के कारण इस शहर में कोई भूखा नहीं सोता, उतना ही सत्य यह भी है की यहां अन्याय करने वालों का मां अहिल्या स्वयं न्याय कर देती है। कुछ दिन पूर्व मध्यप्रदेश की कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर ने मां अहिल्या का कोरोना बीमारी के खात्मे के लिए पूजन किया। मंत्री जी आप मां अहिल्या की पूजा तो करती हैं पर अन्याय के विरोध में आवाज क्यों नहीं उठाती? शहर के लोग ऑक्सीजन, दवाइयां,और अस्पताल में बिस्तरों के लिए दर-दर भटक रहे हैं आप उनके साथ खड़ी क्यों नहीं होती है?

इस शहर में हो रहे अपराधों और अन्याय पर मां अहिल्या खुद ही न्याय कर देती है ।

यह जो भी हो रहा है चाहे पोस्टमार्टम रूम में रंगरेलियां मनाना, या पीली गैंग द्वारा कमजोर और गरीब बच्चे का ठेला पलटा देना, किसी अखबार के ऑफिस में गुंडागर्दी करना या खाकी वर्दी द्वारा छोटे बच्चे के सामने उसके पिता की क्रूरता से पिटाई करना, ऐसे अनेकों मामले हैं जहां अन्याय हो रहा है। इन मामलों में अधिकारी और नेताओं की सेटिंग से जांचे दम तोड़ देती है। ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और नेता यह ध्यान रखें कि यह शहर मां अहिल्या का है जहां न्याय होता ही है। आप लोग जिस तरह से इस शहर की पहचान को मिटाने में लगे हैं ऐसा कदापि नहीं हो सकता।

1 साल पहले हुए लॉकडाउन में जहां शहर के सामाजिक, व्यापारिक और धार्मिक लोगों द्वारा जनमानस की सेवा की गई, इंदौर वासियों सहित प्रवासियों को दाना पानी उपलब्ध करवाया गया, उसकी तारीफ पूरे देश ने की। परंतु आप लोगों के द्वारा उनके व्यापार के ऊपर पीली और खाकी गैंग भेज कर ताले जड़वा दिए गए, बिजली बिल, जलकर, स्वच्छताकर या अन्य किसी प्रकार के टैक्स में आप लोगों द्वारा कोई मदद नहीं की, इसके उलट कर में वृद्धि कर दी गई जिसका विरोध चारों तरफ हुआ।

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भ्रष्ट अधिकारी और नेता ध्यान दें, पूरा शहर मच्छरों की चपेट में है। आप पीली गैंग को उनके मूल काम से हटाकर वसूली में लगा रहे हैं जबकि हर व्यक्ति महामारी के इस दौर में मुश्किल से जीवन यापन कर पा रहा है। इस पीली गैंग को इनके मूल काम में लगाया जाना चाहिए था ताकि शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य हो सके। शहर की कई कालोनियों में ड्रेनेज का पानी आ रहा है, मच्छरों ने पूरे शहर को अपने जाल में फंसा रखा है। नालों की हालत बद से बदतर हो चुकी है जिसके कारण बीमारियां फैल रही हैं। और आप लोग शहर वासियों को अपने पापों के तले दबाए जा रहे हैं।

अधिकारियों का दोगलापन तो देखें कि जिन नर्सिंग/पैरामेडिकल स्टाफ को फर्स्ट लॉक डाउन के समय आपने नौकरी पर रखा, कुछ महीनों बाद उन्हें अनफिट कह कर निकाल दिया। अब कोरोना संक्रमण फिर से फैलने पर आप निर्लज्जता से उन्हें वापस बुला रहे हैं, कुछ तो शर्म करें ।

विगत वर्ष हुए लॉकडाउन में निगम द्वारा जगह जगह पर सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया पर वर्तमान में जबकि बीमारी अपने चरम पर जा रही है, तो निगम द्वारा शुतुरमुर्ग बन अपनी आंखें बंद कर ली गई है ।

सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है एक दुखियारी मां का वीडियो जिसमें वह मुख्यमंत्री से लेकर कलेक्टर तक को बद्दुआ दे रही है। यह तो मात्र एक वीडियो है जो सामने आ गया, ऐसे हजारों केस हैं जो सामने नहीं आ पाते।

धर्म के इस नगरी में आपने मंदिरों में ताले जड़ शराब की दुकानों पर जो भीड़ लगाई है भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों आप ध्यान रखना यह शहर मां अहिल्या का है आप लोगों का न्याय मां स्वयं करेंगी ।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।