जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया है। यह अनुच्छेद संसद के अवकाश के दौरान राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति से संबंधित है।
महुआ मोइत्रा ने इस मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि ये अध्यादेश सीबीआई और ईडी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर हमला करते हैं और केंद्र को उन निदेशकों को चुनने का अधिकार देते हैं जो सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हैं।
मोइत्री की याचिका में कहा गया है कि ये अध्यादेश केंद्र सरकार को ‘जनहित’ में इन निदेशकों के कार्यकाल को बढ़ाने की शक्ति का उपयोग करके मौजूदा ईडी निदेशक या सीबीआई निदेशक को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की अनुमति देता है।
याचिका में कहा गया है कि दोनों अध्यादेश निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं, जैसा कि हमारे देश के संविधान में समानता के अधिकार और जीवन के अधिकार के तहत निहित है।

