पूरे देश में एक देश-एक पुलिस वर्दी, ड्रेस कोड तय करने पर हो विचार- प्रधान मंत्री मोदी

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
3 Min Read

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पुलिस के लिए ‘एक देश-एक यूनिफॉर्म’ पर विचार करने की बात कही है. उन्होंने ‘एक देश एक राशन कार्ड’ की तर्ज पर ‘एक देश एक पुलिस वर्दी’ शुरू करने की वकालत की है.

राज्यों के गृह मंत्रियों के चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, इसे थोपा नहीं जाना चाहिए. इस पर विचार करने की जरूरत है. देश के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां पुलिस की वर्दी का रंग में फर्क देखने को मिलता. जानिए देश के किन हिस्सों में पुलिस की वर्दी का रंग अलग-अलग है.

कोलकाता पुलिस की वर्दी का रंग सफेद है. 1845 में जब अंग्रेजों ने कोलकाता पुलिस का गठन किया था जब सफेद रंग की वर्दी की शुरुआत की गई थी, लेकिन दो साल बाद ही इसका रंग बदलकर खाकी कर दिया गया था, लेकिन कोलकाता पुलिस ने रंग बदलने से साफ मना कर दिया था. कोलकाता पुलिस का कहना था, तटीय क्षेत्र होने के कारण वहां पर नमी ज्यादा है. खाकी वर्दी में अधिक गर्मी लगेगी. इस तर्क के बाद कोलकाता पुलिस की वर्दी सफेद रखी गई जबकि पूरे राज्‍य में खाकी वर्दी पहनी जाती थी.
पुडुचेरी पुलिस की वर्दी में भी बदलाव देखने को मिलता है. यहां पुलिस की टोपी का रंग खाकी नहीं, लाल होता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि देश को आजादी मिलने के बाद यह हिस्सा फ्रांस के अधीन रहा. फ्रांस ने अलग दिखने के लिए पुलिस को लाल टोपी पहनने को कहा था. उस देश में ऐसी ही यूनिफॉर्म का चलन था. 1954 में फ्रांस से अलग होने के बाद भी पुडुचेरी में यह चलन बरकरार रहा.

2018 में उत्तर प्रदेश पुलिस की पुलिस की वर्दी में कई बदलाव किए गए. खाकी रंग को हल्का किया गया. जेब और बेल्ट के डिजाइन में बदलाव हुए. बदलाव के बाद भी वर्दी का रंग खाकी ही रहा. खाकी रंग की शुरुआत भी अंग्रेजों के शासनकाल से शुरू हो गई थी जब वर्दी को साफ रखने में दिक्कत होने लगी तो पुलिसकर्मियों ने खाकी डाई का इस्तेमाल करना शुरू दिया. इस बाद इसे ही आधिकारिक रंग घोषित कर दिया गया.
1973 के पहले तक कर्नाटक पुलिस खाकी शॉर्ट पहनती थी. तत्कालीन सरकार के आदेश के बाद पतलून की शुरुआत हुई. इसके बाद इसमें कई बदलाव किए गए. अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन ने पांच साल की रिसर्च के बाद पुलिस के लिए नई यूनिफॉर्म तैयार की है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह वर्दी हर तरह के मौसम को झेलने मदद करेगी और पूरे देश में एक जैसी वर्दी लागू होगी.
Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।