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ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु)
दैनिक सदभावना पाती
इंदौर। तिथि, चंद्रोदय और निशीथ काल : शरद पूर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। इंदौर के पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह लगभग 11:56 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय शाम लगभग 5:08 बजे और निशीथ काल रात 11:46 से 12:36 बजे तक रहेगा। व्रत, लक्ष्मी पूजन और चांदनी में खीर रखने की परंपरा इसी रात से जुड़ी है। स्थानीय पंचांग में कुछ मिनटों का अंतर संभव है।
रेवती से अश्विनी: अंत से आरंभ का प्रतीक
इस बार शरद पूर्णिमा का विशेष ज्योतिषीय पक्ष रेवती से अश्विनी नक्षत्र का परिवर्तन है। इंदौर की गणना के अनुसार 25 अक्टूबर शाम लगभग 7:22 बजे रेवती नक्षत्र समाप्त होकर अश्विनी आरंभ होगा। रेवती मीन राशि का अंतिम नक्षत्र और अश्विनी मेष राशि का पहला नक्षत्र है। वैदिक ज्योतिष में इनके बीच की संधि को गंडांत क्षेत्र से जोड़ा जाता है। प्रतीकात्मक रूप से यह पुराने अध्याय के समापन और नए अध्याय के आरंभ का संकेत देता है। इसी भाव में शरद पूर्णिमा को पतझड़ से नव आगमन और विसर्जन से सृजन की यात्रा कहा जा सकता है।
सोलह कलाओं वाला चंद्रमा और अमृत वर्षा की मान्यता
लोकमान्यता है कि शरद पूर्णिमा का चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृततुल्य शीतलता रहती है। इसी विश्वास के कारण दूध-चावल की खीर बनाकर चांदनी में रखने और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है। इस मान्यता को किसी रोग के उपचार का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। खीर को स्वच्छ, ढककर और सुरक्षित स्थान पर रखना आवश्यक है। इस परंपरा का सांस्कृतिक संदेश परिवार के साथ प्रसाद साझा करना, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और जीवन में शीतलता बनाए रखना भी है।
‘को जागर्ति’—कौन जाग रहा है?
शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। परंपरागत व्रत-कथा में मां लक्ष्मी के ‘को जागर्ति?’ अर्थात ‘कौन जाग रहा है?’ पूछने की मान्यता प्रचलित है। इस रात लक्ष्मी पूजन, दीप प्रज्वलन, मंत्र-जप और जागरण किया जाता है। इसका आध्यात्मिक अर्थ केवल रातभर जागना नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य, विवेक और चेतना के प्रति जागरूक रहना भी है। समृद्धि की कामना के साथ ईमानदारी, परिश्रम, संतोष और सदाचार अपनाने का संकल्प इस पर्व को सार्थक बनाता है।
मन के विकारों का विसर्जन ही असली साधना
ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं से जोड़ा जाता है। इस बार चंद्रमा का मेष राशि में अश्विनी नक्षत्र के साथ होना पारंपरिक ज्योतिषीय व्याख्या में सक्रियता, गति और नई शुरुआत का प्रतीक माना जा सकता है। लेकिन हर व्यक्ति की मनःस्थिति पर इसका एक जैसा प्रभाव पड़ेगा, ऐसा निश्चित नहीं कहा जा सकता। इस रात कुछ समय मौन बैठें, ध्यान या प्रार्थना करें और अपने भीतर पल रहे क्रोध, मोह, ईर्ष्या, लोभ, कटुता तथा पुराने संताप पर विचार करें। किसी एक नकारात्मक आदत को छोड़ने और किसी संबंध को सुधारने का संकल्प लें। यही मन के अंधकार को पहचानकर सकारात्मकता का सृजन करने की वास्तविक शुरुआत है।
बारह राशियों के लिए पारंपरिक संकेत
- मेष: जल्दबाजी से बचें, विचारों को दिशा दें।
- वृषभ: खर्च और आराम के बीच संतुलन रखें।
- मिथुन: संवाद और मित्रता को महत्त्व दें।
- कर्क: परिवार और भावनात्मक संतुलन पर ध्यान दें।
- सिंह: अध्ययन और आत्मचिंतन के लिए समय निकालें।
- कन्या: दिनचर्या और जिम्मेदारियों को व्यवस्थित करें।
- तुला: रिश्तों में संवाद और सहयोग बढ़ाएं।
- वृश्चिक: चिंता के बजाय समस्या के समाधान पर ध्यान दें।
- धनु: अध्ययन और बच्चों के साथ समय को प्राथमिकता दें।
- मकर: घर-परिवार और कार्य के बीच संतुलन रखें।
- कुंभ: सहयोग और सकारात्मक संवाद बनाए रखें।
- मीन: वाणी में मधुरता और खर्च में विवेक रखें।
पूजा, खीर और आत्मचिंतन का संकल्प
रात में चंद्र दर्शन कर प्रार्थना करें, खीर का भोग लगाएं और सुविधा हो तो कुछ समय शांत बैठकर अपने विचारों का निरीक्षण करें। श्रीसूक्त या अपनी परंपरा के अनुसार मंत्र-जप किया जा सकता है। तामसिक भोजन से परहेज और सात्त्विक आहार की परंपरा भी प्रचलित है। किसी विशेष समय में जागने या कोई उपाय करने से निश्चित फल मिलने का दावा करने के बजाय इसे श्रद्धा और आत्मअनुशासन का अवसर मानें।
प्रकाश की नहीं, दृष्टि की पूर्णिमा
ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु), इंदौर के अनुसार, शरद पूर्णिमा का सार केवल पूर्ण चंद्रमा की सुंदरता में नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने की प्रेरणा में है। बाहर चांदनी फैलती है, तो भीतर विवेक, करुणा और सद्भाव का प्रकाश जगाने का प्रयास होना चाहिए। पुरानी कटुता का विसर्जन करें, अच्छे विचारों का सृजन करें और जीवन में नई शुरुआत के लिए जगह बनाएं। यही शरद पूर्णिमा का संदेश है—“बाहर चंद्रमा पूर्ण हो, तो भीतर अपनी दृष्टि को भी निर्मल और प्रकाशमय बनाएं।”


