भारतीय वायु सेना और नौसेना द्वारा फायर फाइटिंग बॉट (एफएफ बॉट) का औपचारिक समावेश भारत की रक्षा तैयारियों और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में एक निर्णायक मील का पत्थर है। अहमदाबाद स्थित स्टार्ट-अप ‘स्वदेशी एम्प्रेसा’ द्वारा रक्षा मंत्रालय की ‘iDEX’ (इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस) पहल के तहत विकसित यह रिमोट-नियंत्रित रोबोटिक वाहन संवेदनशील और अत्यंत जोखिम वाले क्षेत्रों में अग्निशमन के लिए तैयार किया गया है। नौसेना द्वारा 50 यूनिट्स की सफल आपूर्ति के बाद वायु सेना द्वारा 80 और यूनिट्स का सप्प्लिमेंटरी आर्डर देना इस मंच की वास्तविक विश्वसनीयता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
गोला-बारूद डिपो, ईंधन भंडारण और विमान हैंगरों में आग लगना बेहद विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। 2026 के हालिया वैश्विक संघर्षों, जैसे ईरान और यूक्रेन में बुनियादी ढांचे तथा गोला-बारूद भंडारों पर हुए हमलों, ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शुरुआती मिनटों में द्वितीयक विस्फोटों और अत्यधिक तापमान के कारण मानवीय अग्निशामकों को सीधे भेजना अत्यंत खतरनाक होता है। ‘एफएफ बॉट’ इसी ‘द्वितीयक हथियार’ की चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है।
यह रोबोट अत्यधिक गर्मी प्रतिरोधी शील्डिंग, 360-डिग्री टर्निंग क्षमता, और अत्याधुनिक थर्मल व ऑप्टिकल PTZ कैमरों से लैस है, जो घने धुएं के पार वास्तविक समय के दृश्य कमांडरों तक पहुंचाते हैं। एक्वा फोम जेट और वॉटर फॉग मॉनिटर की मदद से यह क्रू को जोखिम में डाले बिना दूर से ही आग पर काबू पाता है।
यह भारतीय रक्षा खरीद प्रक्रिया की परिपक्वता को दर्शाता है, जहां दोनों सेनाओं ने अलग-अलग समाधान खोजने के बजाय एक ही स्वदेशी तकनीक पर विश्वास जताया है। यद्यपि इसके वजन और संचालन सीमा जैसे तकनीकी मानदंड सार्वजनिक नहीं हैं, फिर भी यह सफलता यह साबित करती है कि भारत के निजी नवाचार अब सशस्त्र बलों की परिचालन आवश्यकताओं को गति और सटीकता से पूरा कर रहे हैं।


