सुब्रमण्यम स्वामी ने खुद को बताया विदुर, छात्रों को द्रौपदी और मुख्यमंत्रियों को कहा कृष्ण |

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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देश में एक तरफ कोरोना संक्रमण हैं तो दूसरी तरफ लाखों छात्रों को नीट और जेईई की परीक्षा देने का संकट। कोरोना के बीच नीट और जेईई की परीक्षाएं होने से देश में बवाल जारी है। इसी बीच भाजपा के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने छात्रों की तुलना द्रौपदी और मुख्यमंत्रियों की तुलना कृष्ण से की है और खुद को विदुर बताया है। सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा कि आज नीट और जेईई परीक्षा के मामले में, क्या छात्रों को द्रौपदी जैसे अपमानित किया जा रहा है?

सीएम कृष्ण की भूमिका निभा सकते हैं। एक छात्र के रूप में और फिर 60 सालों तक प्रोफेसर के तौर पर मेरा अनुभव बताते है कि कुछ गलत होने वाला है। मुझे विदुर जैसा महसूस होता है इससे पहले सुब्रमण्यम स्वामी कह चुके हैं कि जब 11 राज्य नीट और जेईई की परीक्षा कराने का विरोध कर चुके हैं तो सुप्रीम कोर्ट जाने की जरुरत क्या है। उन्होंने कहा कि क्या राज्य के मुख्यमंत्रियों के पास कोई ताकत नहीं है। बता दें कि कुछ राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने पर विचार कर रही हैं। इसके अलावा कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नीट और जेईई परीक्षा को लेकर सात गैर भाजपा मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में यह फैसला लिया गया था कि नीट और जेईई परीक्षाओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। इन सातों राज्य के मुख्यमंत्रियों ने कहा था कि वो केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। नीट-जेईई परीक्षा के विरोध में ऑनलाइन अभियान भी चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर आज यानी 28 तारीख को ही कांग्रेस की ओर से राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन अभियान #SpeakUpForStudentSaftey शुरू किया गया है।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।
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