इंदौर के शासकीय चिकित्सालयों में आयोजित किये गये परामर्श सत्र
इंदौर. विश्व स्तनपान सप्ताह सारे विश्व में स्तनपान को प्रोत्साहित करने और शिशुओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष 01 से 07 अगस्त तक मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है “Step Up For Breastfeeding Educate & Support”, स्तनपान एक सार्वभौमिक उपाय है, जो कि हर व्यक्ति को जीवन में न्यायसंगत शुरुआत देता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत सोमवार को शासकीय चिकित्सालयों में परामर्श सत्रों का आयोजन किया गया। इस पूरे सप्ताह विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
विदित है कि विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य है उचित पोषण, खाद्य सुरक्षा, गरीबी में कमी और स्तनपान के बीच की कड़ियों के बारे में लोगों को जागरूक करना तथा पूर्ण स्तनपान के संरक्षण, संवर्धन और सहयोग को शामिल करना। मां का दूध शिशु के लिए प्रथम प्राकृतिक आहार है, यह उन सभी ऊर्जावान और पोषक तत्वों को प्रदान करता है जिनकी आवश्यकता शिशु को जीवन के प्रथम माह में होती है। छह माह की अवस्था के बाद से एक वर्ष तक मां का दूध शिशु की आवश्यकता को आधा पूरा कर पाता है तथा दूसरे वर्ष के दौरान शिशु के पोषण की एक तिहाई आवश्यकता ही पूरी हो पाती है।
मध्यप्रदेश में NFHS-4 के आंकड़ों के अनुसार जन्म के घंटे के अंदर 34.4 प्रतिशत बच्चों को माँ का दुध मिलता था, जो कि NFHS-5 में बढ़कर 41.3 प्रतिशत हो गया है। इसी तरह 06 माह तक केवल माँ का दूध पीने वाले बच्चों का प्रतिशत 58.2 या जो कि NFHS-5 में पढ़कर 74 प्रतिशत हो गया है। इस तरह हम देख रहे हैं कि व्यवहार परिवर्तन का क्रम जाती है। जन्म के 24 घंटे के बाद स्तनपान शुरू कराने से मौत का खतरा 2.4 गुना बढ़ जाता है। स्तनपान एवं ऊपरी आहार से शिशु मृत्युदर में 19 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है।


