नई दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुआ द्वितीय आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस (ACC) 2026 भारत के भावी सैन्य रोडमैप और क्षेत्रीय सुरक्षा चक्र की एक ऐतिहासिक समीक्षा सिद्ध हुआ है। तीन दिवसीय विचार-विमर्श में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता, भारतीय सेना के तकनीकी पुनर्गठन और ‘जय से विजय’ के विजन पर विशेष बल दिया।
हालांकि, इस सम्मेलन का सबसे दूरगामी पक्ष चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर उभरती बहुआयामी चुनौतियों के प्रति भारत का नया नीतिगत रुख रहा।
चीन (LAC): वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थायी सतर्कता और नई ‘लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन 2026’ के तहत ड्रोन, एआई (AI) और साइबर नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली पर जोर दिया गया है। बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के साथ चीन की किसी भी दुस्साहस का त्वरित और निर्णायक उत्तर देने की नीति को पुनः रेखांकित किया गया। बार बार चीन द्वारा सीमा पर की जा रही हरकतों को देखते हुए ऐसे कई निर्णय लिए गए हैं इस कांफ्रेंस में कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को कारित करने के बारे में सोचने पर भी चीन को तकलीफ हो।
बांग्लादेश: बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच पूर्वी कमान को अत्यधिक चौकस रहने के निर्देश दिए गए हैं। सीमा पार से घुसपैठ, अवैध प्रवासन और पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ने वाले भू-राजनीतिक प्रभावों से निपटने के लिए त्रि-सेवा तालमेल (Tri-Service Synergy) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। बांग्लादेश की सेना भारत की तुलना में अत्यधिक छोटी है पर अक्सर उनके द्वारा उन्मादियों जैसा व्यवहार किये जाने को लेकर यह निर्णय लिया गया है कि सेना को और अधिक अधिकार दिए जाएँ।
पाकिस्तान: पश्चिमी सीमा पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत प्रायोजित आतंकवाद के विरुद्ध शून्य-सहिष्णुता (Zero Tolerance) और निवारक कार्रवाई की नीति पर अडिग है। आधुनिक मारक क्षमता और ‘आत्मनिर्भरता’ के माध्यम से पारंपरिक व गैर-पारंपरिक खतरों को निष्प्रभावी करने की रणनीति बनाई गई है।
यह सम्मेलन स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब केवल प्रतिक्रियात्मक रक्षा नहीं, बल्कि अपनी संप्रभुता की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक स्वायत्तता और निर्णायक परिचालन बढ़त (Decisive Operational Edge) की ओर अग्रसर है।


