स्टार हेल्थ, केयर हेल्थ और Unacademy को भुगतान व क्षतिपूर्ति के आदेश
सदभावना पाती
इंदौर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-2, इंदौर ने हाल के तीन महत्वपूर्ण फैसलों में बीमा और ऑनलाइन शिक्षा कंपनियों की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपभोक्ताओं के पक्ष में निर्णायक आदेश पारित किए हैं। इन मामलों में आयोग ने कंपनियों को लाखों रुपये लौटाने, ब्याज और क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए।
इन तीनों मामलों में पारित आदेशों की पीठ में अध्यक्ष विकास राय, सदस्य लालजी तिवारी तथा एक प्रकरण में सदस्या श्रीमती सरोज मिमरोट शामिल रहीं। विशेष रूप से इन निर्णयों में तथ्यात्मक व विधिक निष्कर्ष सदस्य लालजी तिवारी के विश्लेषण पर आधारित रहे, जिसने मामलों की दिशा तय की।
कोविड क्लेम रोका: स्टार हेल्थ को 3 लाख से अधिक भुगतान आदेश
अंतर सिंह के कोविड-19 उपचार का ₹2.78 लाख से अधिक बीमा क्लेम निरस्त करने पर आयोग ने स्टार हेल्थ को सेवा में कमी का दोषी माना। आयोग ने उपचार व्यय, ब्याज, ₹20,000 क्षतिपूर्ति और ₹10,000 वाद व्यय देने का आदेश दिया। आयोग ने माना कि कोविड उपचार पॉलिसी के दायरे में था और भुगतान रोकना अनुचित था
मेडिक्लेम नहीं दिया: केयर हेल्थ को राशि लौटाने के निर्देश
नरेंद्र नायक की पुत्री के इलाज का मेडिक्लेम न देने पर आयोग ने केयर हेल्थ को दोषी ठहराया। कंपनी को ₹24,500 उपचार व्यय, 9% ब्याज, ₹5,000 मानसिक क्षति और ₹2,000 वाद व्यय देने के आदेश दिए गए। आयोग ने पाया कि चिकित्सा दस्तावेजों का कंपनी ने कोई प्रभावी खंडन नहीं किया
नो-कॉस्ट EMI का वादा तोड़ा: Unacademy को अतिरिक्त ब्याज लौटाना होगा
कोचिंग फीस पर बिना सहमति अतिरिक्त EMI ब्याज वसूलने के मामले में आयोग ने Unacademy को ₹30,240 अतिरिक्त राशि ब्याज सहित लौटाने तथा ₹3,000 क्षतिपूर्ति और ₹2,000 वाद व्यय देने के आदेश दिए। आयोग ने माना कि उपभोक्ता को “बिना ब्याज EMI” का आश्वासन देकर बाद में शुल्क वसूलना सेवा में कमी है
स्पष्ट संदेश—उपभोक्ता से धोखा नहीं चलेगा तीनों आदेशों में सदस्य लालजी तिवारी ने यह स्थापित किया कि—वैध बीमा क्लेम रोकना, चिकित्सा दावे का भुगतान टालना, या वित्तीय शर्तों में भ्रम पैदा कर अतिरिक्त राशि वसूलना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत स्पष्ट रूप से सेवा में कमी है। आयोग ने यह भी संकेत दिया कि कंपनियाँ तकनीकी आधार या प्रक्रियात्मक बहाने बनाकर उपभोक्ता के अधिकारों से बच नहीं सकतीं।
इंदौर उपभोक्ता आयोग के इन लगातार फैसलों को उपभोक्ता अधिकारों की सशक्त रक्षा के रूप में देखा जा रहा है।


