भारत की रक्षा क्षमता में निजी क्षेत्र की भागीदारी अब नई ऊंचाइयों को छू रही है। नोएडा स्थित स्टार्टअप आईजी डिफेंस ने हाल ही में अपने ‘ज्वाला’ सूक्ष्म मिसाइल कार्यक्रम के लिए दो ठोस रॉकेट मोटरों का सफल परीक्षण किया है। यह उपलब्धि भारत की पहली निजी क्षेत्र की माइक्रो-मिसाइल के रूप में उल्लेखनीय है, जो दो से पांच किलोमीटर की दूरी और पांच हजार मीटर की ऊंचाई तक ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है।
यह हार्ड-किल काउंटर-ड्रोन प्रणाली सस्ती और प्रभावी होने के कारण ड्रोन झुंडों जैसे उभरते खतरों से निपटने में विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हो सकती है। आजकल सीमाओं और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में लागत-प्रभावी इंटरसेप्टर की आवश्यकता और भी प्रासंगिक हो गई है। आईजी डिफेंस के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, विंग कमांडर (सेवानिवृत्त) अनूप शर्मा ने ठीक इसी बिंदु पर जोर देते हुए कहा कि बढ़ते ड्रोन जोखिमों के बीच किफायती समाधान अपनाना अनिवार्य है।
‘ज्वाला’ कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती प्रदान करता है। अब तक काउंटर-ड्रोन प्रणालियां मुख्य रूप से सरकारी या विदेशी स्रोतों पर निर्भर थीं। निजी क्षेत्र का यह प्रयास न केवल प्रौद्योगिकी विकास को गति देता है, बल्कि स्वदेशी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत बनाता है। सूक्ष्म मिसाइल की यह क्षमता भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन और निर्यात संभावनाओं के द्वार भी खोल सकती है।
रणनीतिक दृष्टि से देखें तो ड्रोन युद्ध की प्रकृति बदल रही है। सस्ते और बहुसंख्यक यूएवी हमले अब पारंपरिक रक्षा व्यवस्थाओं के लिए चुनौती बन गए हैं। ऐसे में ‘ज्वाला’ जैसी प्रणाली न केवल सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि रक्षा बजट पर बोझ भी कम करेगी। यह परीक्षण भारतीय रक्षा उद्योग के परिपक्व होने का संकेत है।
आईजी डिफेंस की यह सफलता निजी उद्यमिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। आगे के परीक्षणों और एकीकरण के बाद ‘ज्वाला’ भारतीय वायुसेना तथा अन्य सुरक्षा बलों के लिए एक विश्वसनीय विकल्प बन सकती है। आत्मनिर्भरता की दिशा में यह कदम सही समय पर उठाया गया है।


