ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु), इंदौर
दैनिक सदभावना पाती
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
आज 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाले इस पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन की सवारी सप्ताह के वार के आधार पर निर्धारित होती है। प्रचलित श्लोक है—
“शशि सूर्ये गजारूढ़ा, शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे दोलायां, बुधवारे च नौकायाम्॥”
इस मान्यता के अनुसार रविवार और सोमवार को मां हाथी पर, शनिवार और मंगलवार को घोड़े पर, गुरुवार और शुक्रवार को डोली में तथा बुधवार को नाव पर सवार होकर आती हैं। इस वर्ष रविवार को नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। ज्योतिषीय परंपरा में हाथी को वर्षा, कृषि, सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे अच्छी वर्षा और जनकल्याण के सकारात्मक संकेतों से जोड़कर देखा जाता है।
प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। ‘शैल’ का अर्थ पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ बेटी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं। योगाग्नि में देह त्यागने के बाद उन्होंने हिमालयराज के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाईं। उनका विवाह भगवान शिव से हुआ।
मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। वे वृषभ अर्थात नंदी पर विराजमान रहती हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से वे स्थिरता, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। उनकी साधना मूलाधार चक्र से भी जोड़ी जाती है। उनका संदेश है कि जीवन में सफलता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए मन का स्थिर होना आवश्यक है।
अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्रों का महत्व
वैदिक ज्योतिष में अश्विनी, मघा और मूल तीनों नक्षत्रों के स्वामी केतु माने जाते हैं। अश्विनी नक्षत्र नई शुरुआत, ऊर्जा और उपचार का प्रतीक है। मघा नक्षत्र का संबंध पितरों, परंपरा और प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है, जबकि मूल नक्षत्र गहराई से विचार करने, मूल कारणों को समझने और परिवर्तन का संकेत देता है। इन नक्षत्रों का उल्लेख आध्यात्मिक चिंतन, आत्ममंथन और जीवन की बाधाओं को समझने के संदर्भ में किया जाता है। हालांकि, ये तीनों केतु के नक्षत्र हैं, इन्हें नवरात्रि के प्रथम दिन का नक्षत्र नहीं समझना चाहिए।
मां शैलपुत्री के बीज मंत्र और प्रार्थना मंत्र
मां शैलपुत्री की उपासना में मंत्र जाप का विशेष महत्व माना गया है। भक्त श्रद्धापूर्वक निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
बीज मंत्र (जाप के लिए)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः॥
पूजा मंत्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
प्रार्थना मंत्र
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
सफेद पुष्प और घी से बने भोग का महत्व
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को सफेद पुष्प, अक्षत और गाय के घी से बनी मिठाई अर्पित करने की परंपरा है। भक्त मां के समक्ष दीप प्रज्वलित कर मंत्र जाप और ध्यान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना मनोबल, धैर्य और स्थिरता प्राप्त करने की प्रेरणा देती है। नवरात्रि का प्रथम दिन यह संदेश देता है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत शुद्ध विचार, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक भावना के साथ करनी चाहिए।


