भारतीय सेना की तकनीकी संप्रभुता से आधुनिक युद्ध की तैयारी

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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21वीं सदी के युद्धक्षेत्र में जीत का निर्धारण केवल सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता और तीव्र क्षमता संवर्धन से होता है। इसी सामरिक दूरदर्शिता के तहत थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ का बेंगलुरु स्थित ‘515 आर्मी बेस वर्कशॉप’ का दौरा भारतीय सेना के परिवर्तनकारी युग का स्पष्ट संदेश देता है।

‘आज का नवाचार, कल की मिशन-तत्परता’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा तंत्र की नई कार्यसंस्कृति बन चुका है। आर्मी बेस वर्कशॉप में उन्नत निर्माण, स्वदेशी ड्रोन विकास, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3D प्रिंटिंग), क्वांटम और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी उभरती तकनीकों की समीक्षा यह दर्शाती है कि सेना पारंपरिक युद्ध प्रणालियों से आगे बढ़कर भविष्य के नेटवर्क-केंद्रित और तकनीक-संचालित युद्धों के लिए खुद को ढाल रही है। उपकरण उपलब्धता और परिचालन तत्परता बढ़ाने में स्वदेशी नवाचार की भूमिका अब रीढ़ की हड्डी बन चुकी है।

इस परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू थल सेनाध्यक्ष का उद्योग जगत और अकादमिक संस्थानों (Academia) के साथ हुआ संवाद है। आधुनिक दौर में कोई भी सशस्त्र बल अलग-थलग रहकर अत्याधुनिक तकनीक विकसित नहीं कर सकता।

रक्षा अनुसंधान में त्रिस्तरीय सहयोग, सेना, उद्योग और शिक्षा जगत, तकनीकी अवशोषण (Technology Absorption) की गति को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाएगा। जब देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान और स्टार्टअप्स सैन्य आवश्यकताओं के साथ तालमेल बिठाएंगे, तो न केवल आयात पर निर्भरता खत्म होगी, बल्कि अनुसंधान से उत्पाद तक का समय भी कम होगा।

‘जय से विजय’ के संकल्प और ‘आत्मनिर्भरता’ की भावना से प्रेरित यह पहल भारतीय सेना को वैश्विक स्तर पर एक भविष्य-तैयार और आत्मनिर्भर बल के रूप में स्थापित कर रही है। देश की सीमाओं की सुरक्षा अब केवल विदेशी हथियारों के बल पर नहीं, बल्कि स्वदेशी मेधा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के ठोस धरातल पर तय हो रही है।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families