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ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु), इंदौर
दैनिक सदभावना पाती
इंदौर। तिथि और विजय मुहूर्त : शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को देश के अधिकांश उत्तर और मध्य भारतीय क्षेत्रों में विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे प्रारंभ होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे तक रहेगी। प्रचलित पंचांग गणना के अनुसार विजय मुहूर्त दोपहर लगभग 1:59 से 2:45 बजे तक बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और स्थान के अनुसार मुहूर्त में अंतर संभव है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग देखना उचित होगा।
श्रीराम और मां दुर्गा की विजय का पर्व
सनातन परंपरा में विजयादशमी धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था। वहीं, देवी-परंपरा में मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय को भी शक्ति और धर्म की स्थापना के रूप में स्मरण किया जाता है। दोनों कथाएं संदेश देती हैं कि अन्याय, अहंकार और अत्याचार चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म का मार्ग ही श्रेष्ठ है।
शमी पूजा, शस्त्र पूजा और अपराजिता आराधना
विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा, शस्त्र पूजन और मां अपराजिता की आराधना की परंपरा है। शमी पूजा को विजय, शुभता और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। इंदौर सहित मालवा के अनेक क्षेत्रों में शमी के पत्तों को प्रतीकात्मक रूप से ‘सोना’ मानकर एक-दूसरे को देने की परंपरा भी प्रचलित है। इसका भाव है—संबंधों में मिठास, जीवन में समृद्धि और एक-दूसरे के प्रति सद्भाव। शस्त्रों के साथ औजारों, पुस्तकों और कार्य में उपयोग होने वाली वस्तुओं का पूजन भी उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। अपराजिता पूजा और सीमोल्लंघन की परंपरा भी विजयादशमी से जुड़ी है। इसका प्रतीकात्मक संदेश है कि व्यक्ति भय और संकोच की सीमाओं से आगे बढ़े तथा धर्मसम्मत कार्यों के लिए दृढ़ संकल्प ले।
अपने भीतर के दस विकारों पर विजय
रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से मनुष्य के दस विकारों से जोड़कर भी देखा जा सकता है—काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी। हर वर्ष रावण का पुतला जलाना तभी सार्थक है, जब हम अपने व्यवहार में मौजूद किसी बुराई को भी छोड़ने का प्रयास करें। विजय मुहूर्त में एक कागज पर अपना कोई अवगुण लिखकर उसे फाड़ देना एक प्रतीकात्मक संकल्प हो सकता है। असली परिवर्तन उस संकल्प को रोजमर्रा के जीवन में निभाने से आएगा।
विजयादशमी का आध्यात्मिक संदेश
ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु), इंदौर के अनुसार, विजयादशमी केवल बाहरी विजय का उत्सव नहीं, बल्कि आत्मविजय की प्रेरणा भी है। शाम को दीपक जलाकर यह संकल्प लिया जा सकता है—“बाहर श्रीराम की विजय हुई, अब मेरे भीतर संयम और सदाचार की विजय हो।” पर्व का सार यही है कि हम दूसरों पर विजय पाने से पहले अपने अहंकार, क्रोध और अन्यायपूर्ण प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करें। यही धर्म की सच्ची स्थापना और विजयादशमी का शाश्वत संदेश है।


