अच्युत आनंद मिश्रा प्रकरण के बाद विभाग में बड़े फेरबदल के संकेत! ‘मूल पद’ पर लौटेंगे अधिकारी, अनुभवी अफसरों को कमान देने की तैयारी?

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डॉ देवेंद्र मालवीय
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पूर्व अधिकारियों का दावा— अच्युत आनंद मिश्रा से जुड़े अफसरों की भूमिका की हो रही समीक्षा, विभाग के शीर्ष स्तर पर मतभेदों की चर्चाएं भी तेज

भोपाल / इंदौर । मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में सदस्य-सचिव पद को लेकर सामने आए ताजा घटनाक्रम के बीच अब विभाग के भीतर संभावित बड़े प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। विभाग से जुड़े पूर्व अधिकारियों का दावा है कि अच्युत आनंद मिश्रा के कार्यकाल और उनसे जुड़े निर्णयों के दौरान महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में ऐसे अधिकारियों को उनके मूल पद में वापस भेजने और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां अनुभवी एवं पात्र अधिकारियों को सौंपने की कवायद हो सकती है।

पूर्व अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से विभाग के कुछ महत्वपूर्ण पदों पर कनिष्ठ अथवा अन्य व्यवस्था के माध्यम से अधिकारी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब शासन स्तर पर इस व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की चर्चाएं हैं। हालांकि, इन संभावित तबादलों अथवा पदस्थापन संबंधी निर्णयों को लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है।

इसी बीच विभाग के भीतर अच्युत आनंद मिश्रा और विभाग के एक प्रमुख अधिकारी के बीच कथित मतभेदों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं सामने आने लगी हैं। विभाग से जुड़े लोगों के बीच दोनों के बीच प्रशासनिक फैसलों और कामकाज को लेकर मतभेद होने की बातें कही जा रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 30 सितंबर 2026 को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य-सचिव का पद रिक्त हो गया है और 1 अक्टूबर से श्रीमती वर्षा सोलंकी को इस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। बोर्ड के आधिकारिक आदेश में इसकी पुष्टि होती है।

अब निगाह इस बात पर है कि सदस्य-सचिव पद की नई व्यवस्था के साथ क्या बोर्ड में अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी प्रशासनिक बदलाव किए जाते हैं। यदि शासन स्तर पर पदस्थ अधिकारियों की समीक्षा होती है तो यह भी देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि किस अधिकारी की मूल नियुक्ति किस पद पर हुई थी, वर्तमान जिम्मेदारी किस आदेश से मिली और महत्वपूर्ण पद पर बने रहने का आधार क्या है।

विभाग से जुड़े पूर्व अधिकारियों का कहना है कि आने वाला समय बोर्ड के लिए “जवाबदेही और प्रशासनिक पुनर्गठन” का हो सकता है। यदि शासन योग्य अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने और लंबे समय से प्रभावशाली पदों पर जमे अधिकारियों को उनके मूल पद पर वापस भेजने का निर्णय लेता है, तो इसका असर बोर्ड के कामकाज और आने वाले प्रशासनिक फैसलों पर भी दिखाई दे सकता है।

अब बड़ा सवाल यही है— क्या सदस्य-सचिव के बदलाव के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में बदलावों की पूरी श्रृंखला शुरू होने वाली है?

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