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(विचार मंथन) चीन-पाक की चाल 

लेखक-सिद्धार्थ शंकर

पाकिस्तान अपने बढ़ते कर्ज का भुगतान करने के लिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर क्षेत्र (पीओके) गिलगित-बाल्टिस्तान (जीबी) को चीन को लीज पर देने की तैयारी कर रहा है। गिलगित-बाल्टिस्तान वह भूभाग है, जिस पर चीन की काफी समय से नजर है। पाकिस्तान जिस गिलगित-बाल्टिस्तान को अवैध रूप से अपने कब्जे में कर रहा है, वह चीन के दक्षिण एशियाई विस्तार के लिए वरदान होगा। अगर पाकिस्तान चीन को गिलगित-बाल्टिस्तान सौंप देता है तो उसे इसके लिए चीन की तरफ से मोटी रकम मिल सकती है जो उसके मौजूदा आर्थिक संकट से निपटने में मदद कर सकती है। लेकिन यह कदम उसे भारी भी पड़ सकता है  क्योंकि अमेरिका कभी भी नहीं चाहेगा कि चीन का प्रभाव किसी भी तरह से बढ़े। अमेरिका भविष्य में आईएमएफ, विश्व बैंक और अन्य वैश्विक एजेंसियों से धन प्राप्त करने से निकट भविष्य के लिए पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट भी कर सकता है। चीनी नेता पाकिस्तान की सरकारों को तब से गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तानी राज्य बनाने की सलाह देते रहे हैं, जब से चीन ने पाक के रास्ते अरब सागर तक अपनी पहुंच बनाने के लिए अपने कब्जे वाले शिनजियांग प्रांत (ईस्ट-तुर्किस्तान) से लेकर पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ग्वादर तक सड़क बनाने और वहां अपना नौसैनिक अड्डा बनाने का ‘सीपैकÓ प्रोजेक्ट शुरू किया है। शुरू में 25 अरब डॉलर की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को चीन ने बढ़ाते-बढ़ाते 60 अरब डॉलर का कर लिया है। इसका एक बड़ा हिस्सा भारत के साथ विवाद वाले गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) के इलाकों से गुजरता है। चीन को वहां भारत की ओर से कानूनी अड़चनों और सैनिक कार्रवाई की आशंका बनी रहती है। चीन चाहता है कि अगर पाकिस्तान इन इलाकों को कानूनी तौर पर अपने प्रांत घोषित कर देता है तो वह सीपैक और दूसरी कई रियायतों के लिए पाकिस्तान सरकार के साथ कानूनी संधि कर सकेगा। तब भारतीय विरोध केवल सैनिक चरित्र वाला रह जाएगा। भारत की सैनिक कार्रवाई की स्थिति में चीन को पाकिस्तान की मदद से भारत के खिलाफ दोहरे मोर्चे खोलने का बहाना मिल जाएगा। सीपेक प्रोजेक्ट की पूंजी और उस पर ब्याज के दबाव से पाक को राहत देने के लिए चीन पूरे गिलगित-बाल्टिस्तान को 99 साल के लिए लीज पर लेने की फिराक में है। गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर चीन की और भी चिंताएं हैं। लद्दाख में जिस गलवन घाटी पर अचानक हमला करके चीनी सेना ने कब्जे का प्रयास किया था, वह चीन के काराकोरम हाइवे की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह सड़क भारतीय क्षेत्र अक्साई चिन और पाकिस्तान से गिफ्ट के तौर पर मिले शक्सगाम के माध्यम से गिलगित-बाल्टिस्तान के रास्ते नए सीपैक मार्ग को जोड़ती है। इस हमले का एक और चीनी लक्ष्य भारत के सियाचिन ग्लेशियर पर भी कब्जा जमाना था, जिससे अक्साई चिन और गिलगित-बाल्टिस्तान के बीच भारतीय सेना की उपस्थिति खत्म हो जाए और चीनी सेना को गिलगित-बाल्टिस्तान तक भारत की चुनौती से लगभग पूरी मुक्ति मिल जाए। इसके अलावा चीन की आंतरिक सुरक्षा और शिनजियांग पर अपना औपनिवेशिक कब्जा बनाए रखने के लिए भी गिलगित-बाल्टिस्तान का चीन के लिए बहुत महत्व है।
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