फ्रांस ने हाल ही में अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करते हुए महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पुष्टि की कि परमाणु पनडुब्बी ‘ले विजिलेंट’ से नए एम 51.3 सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (एसएलबीएम) का प्रथम परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया। इस परीक्षण को फ्रिगेट औवेर्न पर से देखा गया। अनुमानित 9,000 से 10,000 किलोमीटर की रणनीतिक रेंज वाले इस उन्नत मिसाइल ने फ्रांस की स्वतंत्र परमाणु निरोधक क्षमता को वैश्विक स्तर पर और प्रभावी बना दिया है।
यह परीक्षण फ्रांस की रक्षा आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है। 2017 से एक दशक में रक्षा बजट को दोगुना करने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है। तीसरी पीढ़ी की एसएसबीएन पनडुब्बियों और भविष्य के हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास के साथ फ्रांस यूरोप में कुछ देशों में से एक है जो अपनी स्वतंत्र परमाणु वितरण प्रणाली बनाए रखे हुए है। जबकि कई यूरोपीय देश अमेरिकी छत्रछाया पर निर्भर हैं, फ्रांस ने अपनी स्वायत्तता को प्राथमिकता दी है।
परंतु यह उपलब्धि एक गहरी रणनीतिक सच्चाई भी रेखांकित करती है। बाहरी सैन्य शक्ति और अत्याधुनिक हथियार अकेले किसी राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते। फ्रांस में हाल के वर्षों में शहरों और सड़कों पर बढ़ती हिंसा तथा सामाजिक अस्थिरता की घटनाएं बताती हैं कि आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था उतनी ही महत्वपूर्ण है। अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप से बड़े पैमाने पर प्रवासन से जुड़ी चुनौतियां आंतरिक सुरक्षा तंत्र, खुफिया नेटवर्क और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की वास्तविक सुरक्षा बाहरी निरोधक क्षमता और आंतरिक स्थिरता के संतुलन पर निर्भर करती है। फ्रांस का यह परीक्षण यूरोपीय रक्षा स्वायत्तता की दिशा में सकारात्मक कदम है, लेकिन साथ ही यह याद दिलाता है कि हथियारों का विकास आंतरिक सुरक्षा की मजबूती के बिना अधूरा है। राष्ट्रों को दोनों मोर्चों पर समान रूप से सजग रहना होगा।


