यूक्रेन के ज़हाइटोमिर में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमले ने जर्मन कंपनी ‘क्रोमबर्ग एंड शुबर्ट’ के कारखाने को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। वायरिंग के हार्नेस बनाने वाले इस प्लांट से वोक्सवैगन, ऑडी, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज और पोर्श जैसी कंपनियों को आपूर्ति होती है। तीन हजार पांच सौ कर्मचारियों वाला यह संयंत्र पहले भी अगस्त में क्षतिग्रस्त हो चुका था। इस बार कोई हताहत नहीं हुआ, क्योंकि फायर ब्रिगेड ने तेजी से आग पर काबू पाया।
उसी रात कीव में रूसी ड्रोनों ने विस्फोट किए। आठ लोग घायल हुए। यूक्रेनी वायु रक्षा ने कई खतरों को बेअसर किया, पर राजधानी में गूंजते विस्फोटों ने फिर साबित कर दिया कि युद्ध अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा। अब सेनाएं नागरिक ठिकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमले करने से पीछे नहीं हट रही हैं और ये ट्रेंड भविष्य के लिए बिलकुल भी सही नहीं है।
आर्थिक क्षति गहरी है। उद्योग नष्ट, कर राजस्व घटा और परिवारों की कमाई छिन गई। यह हमला टैंक या हथियार कारखाने पर नहीं, बल्कि यूरोपीय कार उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला पर हुआ। लंबे संघर्ष का यही परिणाम है, यूक्रेन की औद्योगिक रीढ़ जल रही है, जबकि विजय का वादा दूर होता जा रहा है।
इतिहास की याद ताजा होती है। द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी ने रूस पर हमला किया था और साइबेरिया की ठंड में उसकी सेना का हश्र सब जानते हैं। आज रूस यूक्रेन में जर्मन आर्थिक हितों को निशाना बना रहा है। क्या इतिहास किसी रूप में खुद को दोहरा रहा है? यदि हां, तो रूस-यूक्रेन युद्ध का दायरा और तीव्रता दोनों बढ़ सकते हैं।
रणनीतिक दृष्टि से यह घटना चेतावनी है। नागरिक उद्योग पर हमले युद्ध को और जटिल बनाते हैं। यूरोपीय हित प्रभावित होने से तनाव बढ़ेगा। कूटनीति और संयम की जरूरत पहले से कहीं अधिक है, वरना क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक आयाम ले सकता है।


