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Indore News – पुलिसकर्मी सीख रहे इशारों की भाषा, ताकि मूक-बधिरों की समस्या समझकर दूर कर सकें

इंदौर देश में स्वच्छता में नंबर वन शहर तो है ही, अब साथ ही इंदौर ने एक अलग कोशिश की और भी कदम बाधा दिया है. अब इंदौर शहर के पुलिसकर्मी इशारों की भाषा सीख रहे हैं ताकि, मूक-बधिरों की समस्या समझ सकें और दूर कर सकें. उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है कि मूक-बधिर जब थाने आएं तो उन्हें अपना दोस्त समझें. देश में साइन लैंग्वेज को 23वीं भाषा का दर्जा मिलने के बाद अब इसका विस्तार भी होने लगा है. मध्य प्रदेश के इंदौर को मूक-बधिरों के लिए देश का पहला थाना स्थापित करने का गौरव प्राप्त है. इसके बाद अब पुलिस विभाग ने एक और नई पहल की है. संभाग के सभी थानों के पुलिसकर्मियों को इशारों की भाषा सिखाई जा रही है, ताकि वे मूक बधिरों की बातों को समझ सकें और उनकी समस्याओं का निराकरण कर सकें.देश में इस तरह का ये पहला प्रयोग है.

गौरतलब है कि, देश के 78 लाख मूक बधिरों को न्याय दिलाने के लिए मिनी मुंबई इंदौर से नई शुरूआत हो रही है. इंदौर जोन के आईजी हरीनारायणचारी मिश्र के निर्देश पर संभाग के सभी थानों के पुलिसकर्मियों को इशारों की भाषा की ट्रेनिंग दी जा रही है. साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट ज्ञानेन्द्र पुरोहित और मोनिका पुरोहित इन पुलिसकर्मियों को इशारों की भाषा सिखा रहीं हैं. इसके लिए पुलिस अधिकारियों के सामने कई प्रजेंटेशन दिए गए. इनके माध्यम से बताया गया कि मूक-बधिरों को भी न्याय की जरूरत पड़ती है. प्रेजेंटेशन में बताया गया कि कोई भी मूक-बधिर शिकायत करने थाने जाता है तो उसकी शिकायत को समझने के लिए एक्सपर्ट की जरूरत पड़ती है. लेकिन, थानों में ऐसी कोई व्यवस्था न होने से उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता और उन्हें तत्काल सहायता नहीं मिल पाती. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए आईजी ने हर थाने के कुछ पुलिसकर्मियों को मूक-बधिरों की भाषा सीखने के निर्देश दिए.इसके बाद इंदौर के तुकोगंज थाने में इंदौर संभाग के खंडवा, खरगोन, धार, झाबुआ, बड़वानी, बुरहानपुर और अलीराजपुर जैसे आदिवासी बाहुल्य जिलों के थानों के पुलिसकर्मियों को साइन लैंग्वेज की ट्रेनिंग दी जा रही है. पुलिसकर्मियों को दिव्यांगों के व्यवहार से लेकर क्रियाकलापों के बारे में भी बताया जा रहा है. पुलिसकर्मी भी इसे बड़े ध्यान से सीख रहे हैं. बुरहानपुर से आए पुलिस आरक्षक मनीष उज्जैनिया का कहना है कि ये ट्रेनिंग उनके लिए बहुत मददगार साबित होगी. अब थाने में जो भी मूक-बधिर फरियादी आएगा उससे हम लोग उसकी समस्या जान सकेंगे और तत्काल कार्यवाही भी कर सकेंगे. वहीं दूसरे आरक्षक सबल सिंह देवराहा का कहना है कि उन्होंने मूक-बधिरों के सिंबल्स को सीखा है. यदि उनके थाने में कोई मूक-बधिर आएगा तो उससे इशारों से उसका नाम, पता और समस्या पूछ सकेंगे और उसका निराकरण भी कर सकेंगे

मील का पत्थर साबित होगी ट्रेनिंग

इंदौर के साउथ तुकोगंज थाने में पदस्थ टीआई कमलेश शर्मा का कहना है कि निश्चित तौर पर ये ट्रेनिंग मूक-बधिरों को न्याय दिलाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी. इस तरह की ट्रेनिंग हर जिले के पुलिसकर्मियों को दी जानी चाहिए. इससे मूक-बधिरों की भाषा पुलिस समझ सकेगी और वे जब थाने में शिकायत लेकर पहुंचेंगे तो पुलिस अपने आपको असहज महसूस नहीं करेगी. दिव्यांगों की समस्या को समझ कर उनकी मदद कर पाएगी . मूक बधिर पुलिस सहायता केंद्र के संचालक ज्ञानेंद्र पुरोहित का कहना है कि अलग-अलग जिलों के पुलिसकर्मियों को बुलाकर उन्हें मूक-बधिर और दिव्यांग कितने प्रकार के होते है, उनकी क्या समस्याएं होती है, उनसे कैसे संवाद करना है ये सब यहां सिखाया जा रहा है. साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट मोनिका पुरोहित का कहना है कि इस ट्रेनिंग का मकसद दिव्यांग लोगों, खासतौर पर दिव्यांग महिलाओं को जल्दी न्याय दिलाना है. दिव्यांग महिलाओं के साथ अपराध तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में यदि कोई पीड़िता थाने पर पहुंचती है और पुलिस उसकी बात समझ जाती है तो उनमें पुलिस के प्रति विश्वास पैदा होगा. उन्हें लगेगा कि पुलिस उनकी दोस्त है वो उनकी भाषा समझती है. वे निडरता के साथ पुलिस थाने तक पहुंच सकती हैं.

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