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इंदौर : पार्किंग संचालन में बड़ी गड़बड़ी आई सामने, कलेक्टर ने मांगा 9 साल का हिसाब, तीन रिटायर्ड कर्मचारियों सहित 5 को नोटिस

इंदौर. कलेक्टोरेट में कर्मचारी ही कलेक्टोरेट मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसाइटी बनाकर 9 साल से पार्किंग का ठेका देकर मनमाने शुल्क की वसूली करवा रहे हैं।

गुरुवार को मामला सामने आने पर कलेक्टर ने जांच के लिए एडीएम को आदेशित किया था। प्रारंभिक पड़ताल के बाद पार्किंग संचालन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है।

एडीएम ने सोसाइटी के चार पदाधिकारियों, पार्किंग संचालन में परिजन का सहयोग कर रहे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व समाधान के पूर्व मैनेजर को नोटिस जारी किया है। सभी को सोमवार को प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के लिए कहा है।

प्रशासन मामले में एफआईआर की भी तैयारी कर रहा है। पिछला हिसाब भी मांगा गया है।
कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देश पर एडीएम पवन जैन व एसडीएम मुनीष सिकरवार जांच कर रहे हैं।

अनुबंध के अनुसार, ठेके से मिलने वाली राशि का 75 प्रतिशत संकुल की समाधान सहभागिता समिति में तथा 25 प्रतिशत कर्मचारी वेलफेयर के लिए दिया जाना था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि राशि जमा करवाने के मामले में 2013 के बाद से गड़बड़ी सामने आई है।

एडीएम के अनुसार, सोसायटी के पूर्व व वर्तमान पदाधिकारियों मीठालाल जोशी, संतोष तिवारी, राजेश्वरी मेहरा, विजय शंकर मिश्रा व सहभागिता समिति के ज्ञाननाथ पांडे को नोटिस जारी किया है। पार्किंग संचालक कलेक्टोरेट के ही कर्मचारी दिलीप गौड़ के परिजन हैं। गौड़ भू-अभिलेख में पदस्थ है। उसे भी नोटिस जारी किया गया है।

15 साल से हो रहा संचालन
कलेक्टोरेट में पार्किंग का संचालन करीब 15 साल से किया जा रहा है। इसकी व्यवस्था के लिए कलेक्टोरेट कर्मचारियों की ही एक सोसाइटी इसका ठेका देती रही है। वर्तमान में दो साल से दो पहिया के 10 व चार पहिया के लिए 20 रुपए वसूल किए जा रहे हैं। पार्किंग के लिए बेरिकेड लगाकर वाहनों को रोका जाता है।
बाहर के वाहनों से भी शुल्क लिया जा रहा था। बुधवार को एडीएम ने संचालक को बुलाकर शुल्क 5 व 10 रुपए करने के लिए कहा। इसके बाद भी शुल्क कम नहीं करने पर कलेक्टर ने गुरुवार को पार्किंग का ठेका निरस्त कर सोसाइटी की जांच के निर्देश दिए।

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