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MP News – क्षतिग्रस्त कारम बांध की शासन ने 5 दिन में मांगी रिपोर्ट

एक वैज्ञानिक सहित तीन अफसरों सौंपा जांच का जिम्मा
भोपाल। कारम नदी पर बने 304 करोड़ के बांध के क्षतिग्रस्त होने की जांच के लिए शासन ने एक कमेटी का गठन किया है, जिसमें तीन अफसरों के साथ एक वैज्ञानिक को भी शामिल किया है और पांच दिन में जांच प्रतिवेदन मांगा है। गनीमत रही कि बारिश बंद हो गई और बांध ढहा नहीं। अन्यथा 18 गांवों में भीषण विपदा आ जाती। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद मोर्चा संभाला और अनवरत वल्लभ भवन के कंट्रोल रूम में आला अफसरों के साथ चल रहे आपदा प्रबंधन की मॉनिटरिंग करते रहे। बांध के एक हिस्से को काटकर पानी निकाला गया, ताकि बांध फटे नहीं।
अब इस बांध में हुए भ्रष्टाचार को लेकर भोपाल से दिल्ली तक हल्ला मचा है, क्योंकि पीएमओ कार्यालय से भी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी। चार साल पहले जो 3 हजार करोड़ का ई-टेंडर घोटाला उजागर हुआ था उसमें कारम बांध का ठेका भी शामिल रहा और विधानसभा में ही विभागीय मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि बांध के संबंध में ईओडब्ल्यू भोपाल ने प्रकरण दर्ज किया है।
हालांकि बाद में ई-टेंडर घोटाला भी फाइलों में दफन हो गया और कारम बांध निर्माणाधीन होने के साथ अभी बारिश में भर गया, जिसके टूटने की नौबत आ गई। अब शासन के निर्देश पर जल संसाधन विभाग के अवर सचिव संजीव गुप्ता ने चार अधिकारियों की जांच टीम बनाई, जिसके अध्यक्ष अपर सचिव आशीष कुमार, वैज्ञानि डॉ. राहुल जायसवाल, मुख्य अभियंता दीपक सातपुते और बांध सुरक्षा संचालक अनिल सिंह को शामिल किया गया।
42 किसानों के गांवों का पानी फिजूल बह गया
कारम बांध का निर्माण इसलिए किया गया ताकि आसपास के 42 गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके और साथ ही ग्रामीणों की पेयजल समस्या का भी निराकरण हो सके। लेकिन बारिश का भरा पानी फिजुल में बहाना पड़ा, जिसके चलते अब कांग्रेस ने भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा कि 304 करोड़ पानी में बह गए और भाजपा सरकार जश्न मना रही है। भ्रष्टाचार की राशि किस-किस ने डकारी और ठेकेदार अशोक भारद्वाज किस मंत्री का खास है और अभी जो आपदा प्रबंधन सरकार को करना पड़ा उसमें ही 2 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो गई और निचले गांव डूबे, जिसमें किसानों की फसलें तबाह हो गई। वहीं 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान भी हो गया।
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