ग्रेट निकोबार परियोजना- भारत की रणनीतिक प्रतिबध्दता पर कितना सही है विपक्ष का आरोप

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 28 अप्रैल को ग्रेट निकोबार द्वीप का दौरा किया और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ₹92,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजना को ‘भारत के सबसे बड़े घोटालों में से एक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से 160 वर्ग किलोमीटर वर्षावन नष्ट होगा और आदिवासी समुदायों, खासकर शोम्पेन शिकारी-संग्राहक जनजाति पर गंभीर खतरा मंडराएगा।

यह परियोजना भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुल 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, पावर प्लांट और टाउनशिप्स का विकास शामिल है। इसका उद्देश्य न केवल स्थानीय रोजगार सृजन और आर्थिक विकास है, बल्कि विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करना और मलक्का जलडमरूमध्य के निकट भारतीय नौसेना की उपस्थिति को मजबूत करना भी है।

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते इंडो-पैसिफिक तनाव और चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच ग्रेट निकोबार का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। यह क्षेत्र सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। मजबूत बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं भारत को क्षेत्र में लंबी दूरी की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और समुद्री व्यापार सुरक्षा की क्षमता प्रदान करेंगी। जो लोग कहते हैं कि इससे हम हार्मुज की तरह मलक्का को ‘चोक’ कर सकेंगे, वे सरलीकरण कर रहे हैं। वास्तविकता में यह परियोजना रक्षा क्षमता निर्माण और आर्थिक आत्मनिर्भरता का संतुलित प्रयास है, न कि किसी एकल जलमार्ग को बाधित करने की योजना। इस मामले की पूरी जांच की गई तो पता चला कि किसी भी नेता या सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने यह बात कभी नहीं कही कि इस परियोजना का उद्देश्य किसी भी रूप में मलाका स्ट्रेट को बाधित करने का है पर विदेश में बैठे एक ब्लॉगर ने सबसे पहले इस परियोजना पर भ्रम फैलाया जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने उस इलाके का दौरा करने के बाद इस तरह का बयां जारी कर दिया।

पर्यावरणविदों और आलोचकों की चिंताएं भी नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं। अनुमान है कि परियोजना में लाखों पेड़ कट सकते हैं और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होगा। शोम्पेन जैसी संवेदनशील जनजातियों के अधिकारों और उनके पारंपरिक जीवनशैली की रक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

विकास और संरक्षण के बीच संतुलन खोजना चुनौतीपूर्ण है। भारत जैसे विकासशील राष्ट्र को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के लिए बुनियादी ढांचा निर्माण की आवश्यकता है, लेकिन पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, पुनर्वास और आदिवासी सहमति को पारदर्शी तरीके से लागू करना अनिवार्य है।

ग्रेट निकोबार परियोजना केवल एक द्वीप विकास योजना नहीं, बल्कि 21वीं सदी की भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है। विपक्ष की आलोचना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय हितों को भावनात्मक राजनीति से ऊपर रखना चाहिए। सतर्क कार्यान्वयन और वैज्ञानिक निगरानी के साथ यह परियोजना भारत की समुद्री शक्ति और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत कर सकती है।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families