अमेरिका के ईरान पर ताजा हमले: वैश्विक संकट और भारत के समक्ष चुनौतियाँ

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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वाशिंगटन से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले शुरू कर दिए हैं। टॉमहॉक मिसाइलों और फाइटर जेट्स के जरिए अंजाम दिए गए इन हमलों के निशाने पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, राडार स्टेशन और दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप, मीनाब, सिरीक तथा तेहरान से करीब 40 मील दूर के इलाके शामिल हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम से इन अभियानों का सीधा निरीक्षण किया, जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी मौजूद रहे।

यह कार्रवाई ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध और ईरानी आक्रामकता के जवाब में की गई है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हमले ईरान की परमाणु सुविधाओं और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को निशाना बनाते हैं। ईरान ने जवाबी कदम के रूप में हार्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की, लेकिन अमेरिकी नौसेना ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्र में समुद्री यातायात सामान्य रूप से जारी है।

रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित करेगा। अमेरिका की ‘पूर्ण शक्ति’ वाली रणनीति ईरान को मजबूत संदेश दे रही है, जबकि तेहरान की ओर से ‘रोकने’ की अपील और आगे की धमकियों का आदान-प्रदान क्षेत्र में तनाव को नया आयाम दे रहा है।

भारत और भारतीय उपमहाद्वीप पर प्रभाव 

भारत के लिए यह स्थिति बहुआयामी चुनौती प्रस्तुत करती है। विश्व का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग हार्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि देश अपनी कुल तेल आयात का लगभग 60 प्रतिशत इस मार्ग से प्राप्त करता है। बढ़ते तेल दाम महंगाई को बढ़ावा देंगे और आर्थिक विकास को प्रभावित करेंगे।

क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भारत को ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों (चाबहार बंदरगाह) और अमेरिका-इजराइल के साथ बढ़ते सामरिक सहयोग के बीच संतुलन बनाना होगा। पाकिस्तान और चीन की संभावित भूमिका भी चिंता का विषय है, क्योंकि वे ईरान को समर्थन देकर भारत-विरोधी गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।

भारतीय विदेश नीति को अब सतर्क कूटनीति और ऊर्जा विविधीकरण पर जोर देना चाहिए। रक्षा विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारतीय नौसेना को अरब सागर में अपनी तैनाती मजबूत करनी चाहिए और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों (रूस, सऊदी अरब, UAE) को और विकसित करना चाहिए।

यह घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि वैश्विक सुरक्षा का कोई भी मोर्चा भारत से अलग नहीं है। ‘रक्षा सम्वाद’ स्तंभ में हम निरंतर इस बात पर बल देते हैं कि शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं और कूटनीतिक कौशल दोनों को और निखारना होगा।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families