- 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण: भारत में नहीं दिखेगा, फिर भी रहेगा ज्योतिषीय प्रभाव –
- भारत के समय अनुसार ग्रहण का समय (ज्योतिषीय प्रभाव के लिए)
- कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
- ग्रहों का विशेष संयोग: क्यों माना जा रहा है महत्वपूर्ण
- विश्व स्तर पर संभावित ज्योतिषीय संकेत
- भारत पर संभावित प्रभाव
- शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- सोना-चांदी और धातुओं का भविष्य
- मौसम और प्राकृतिक घटनाएं
- सामाजिक जीवन और पारिवारिक संबंध
- स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी
- क्या करें
- क्या न करें
- धार्मिक मंत्र
- निष्कर्ष
ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु), इंदौर
12 अगस्त 2026, बुधवार को भाद्रपद कृष्ण अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। अमावस्या का प्रारंभ प्रातः 01:53 बजे होगा तथा समापन रात्रि 11:06 बजे होगा। इस दौरान चंद्रमा कर्क राशि में पुष्य एवं आश्लेषा नक्षत्र में संचरण करेंगे। कर्क लग्न में सूर्य, चंद्र, बुध और गुरु का संयोग रहेगा। वहीं गुरु ग्रह 14 अगस्त तक अस्त रहेंगे तथा सूर्य के निकट होने से चंद्र एवं गुरु का तेज क्षीण माना जाएगा। इसी समय शनि वक्री अवस्था में रहेंगे, जिससे ग्रहों का यह योग सामान्य नहीं माना जा रहा है।
12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण: भारत में नहीं दिखेगा, फिर भी रहेगा ज्योतिषीय प्रभाव –
वर्ष का दूसरा सूर्य ग्रहण (वलयाकार/आंशिक प्रभाव क्षेत्र सहित) 12 अगस्त 2026 को लगेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा क्योंकि उस समय भारत में रात्रि होगी। इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा तथा मंदिरों और धार्मिक गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। हालांकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहण का प्रभाव केवल दृश्यता से नहीं, बल्कि ग्रहों की स्थिति और गोचर से भी आंका जाता है। इसी आधार पर इसका प्रभाव भारत सहित विश्व पर माना जा रहा है।
भारत के समय अनुसार ग्रहण का समय (ज्योतिषीय प्रभाव के लिए)
ग्रहण प्रारंभ – सुबह 08:37 बजे, परमग्रास – सुबह 10:15 बजे, ग्रहण समाप्त – दोपहर 11:53 बजे, भारत में सूतक – मान्य नहीं, (खगोलीय घटना – भारत में रात्रिकालीन समय)
प्रारंभ – 12 अगस्त, रात 9:04 बजे, वलयाकार चरण प्रारंभ – रात 10:28 बजे
मध्य – रात 11:14 बजे, समाप्ति – 13 अगस्त, सुबह 4:25 बजे
कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
यह वलयाकार सूर्य ग्रहण (Ring of Fire) मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन, आर्कटिक क्षेत्र तथा यूरोप के कुछ भागों में दिखाई देगा। कई स्थानों पर कुछ मिनटों के लिए दिन में अंधकार जैसा दृश्य बनेगा। भारत में इसे प्रत्यक्ष नहीं देखा जा सकेगा।
ग्रहों का विशेष संयोग: क्यों माना जा रहा है महत्वपूर्ण
इस समय सूर्य सिंह राशि में केतु के प्रभाव क्षेत्र में रहेंगे, जबकि राहु कुंभ राशि में रहेगा। गुरु अस्त अवस्था में हैं तथा शनि वक्री गति से संचरण कर रहे हैं। वैदिक ज्योतिष में इस प्रकार का संयोग नेतृत्व, निर्णय क्षमता, शासन व्यवस्था तथा सामाजिक मनोविज्ञान पर प्रभाव डालने वाला माना जाता है। इसे “तेज और विवेक की परीक्षा” का समय कहा गया है।
विश्व स्तर पर संभावित ज्योतिषीय संकेत
ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण के बाद आने वाले महीनों में कई देशों में सत्ता परिवर्तन, बड़े नेताओं के स्वास्थ्य अथवा प्रतिष्ठा से जुड़े घटनाक्रम, युद्ध एवं वैश्विक तनाव में वृद्धि जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना व्यक्त की गई है। ऊर्जा बाजार, विशेषकर तेल और बहुमूल्य धातुओं में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।
भारत पर संभावित प्रभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भारत की कुंडली में सिंह का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए यह ग्रहण शासन, प्रशासन और राजनीति को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है। केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ सकता है, नए विधेयकों और नीतियों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा सकते हैं तथा विपक्ष को सक्रिय होने के अवसर मिल सकते हैं।
शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ग्रहण के बाद लगभग 15 दिनों तक शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है। सरकारी बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में दबाव तथा बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए बड़े निवेश संबंधी निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है।
सोना-चांदी और धातुओं का भविष्य
ग्रहण के दौरान बनने वाले ग्रह योगों के कारण सोने और चांदी में तेजी के संकेत माने जा रहे हैं। सुरक्षित निवेश के रूप में बहुमूल्य धातुओं की मांग बढ़ सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।
मौसम और प्राकृतिक घटनाएं
ग्रह स्थिति के आधार पर अगस्त के अंतिम सप्ताह में भारी वर्षा, बाढ़ अथवा मौसम संबंधी असामान्य घटनाओं की संभावना व्यक्त की गई है। तटीय एवं नदी क्षेत्रों में विशेष सतर्कता रखने की आवश्यकता हो सकती है।
सामाजिक जीवन और पारिवारिक संबंध
इस अवधि में पिता-पुत्र, गुरु-शिष्य तथा सरकार और जनता के बीच मतभेद बढ़ने की संभावना मानी गई है। अहंकार, भ्रम और अफवाहों का प्रभाव बढ़ सकता है। सोशल मीडिया पर झूठी एवं भ्रामक सूचनाओं के तेजी से फैलने की आशंका भी व्यक्त की गई है।
स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी
आंखों, हृदय, रक्तचाप तथा मानसिक तनाव से जुड़े रोगियों को विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। अनिद्रा, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन तथा मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। नियमित दिनचर्या और संयमित जीवनशैली लाभदायक रहेगी।
क्या करें
प्रतिदिन “ॐ घृणिं सूर्याय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें। सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें। गेहूं, गुड़ एवं तांबे का दान करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
सत्य, सेवा और संयम का पालन करें।
क्या न करें
ग्रहण के प्रभावकाल में बिना आवश्यकता बड़े निवेश से बचें। नए एवं महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ करने में सावधानी रखें। अहंकार, असत्य एवं अनावश्यक विवादों से दूर रहें।
सरकारी एवं कानूनी मामलों में जल्दबाजी से बचें।
धार्मिक मंत्र
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।
ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥
निष्कर्ष
ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु) के अनुसार, 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण ‘तेज की परीक्षा’ का काल है। जब गुरु अस्त हों, शनि वक्री हों और सूर्य महत्वपूर्ण ग्रह योगों में स्थित हों, तब व्यक्ति और समाज दोनों के लिए संयम, सत्य, धैर्य तथा सेवा का मार्ग सबसे अधिक हितकारी माना जाता है। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा और सूतक भी मान्य नहीं होगा, लेकिन वैदिक ज्योतिष के अनुसार इसके ग्रहयोगों का प्रभाव आने वाले लगभग छह महीनों तक विभिन्न क्षेत्रों में अनुभव किया जा सकता है।


