अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक घेराबंदी को और सख्त करने की पुष्टि की है। राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर 14 जुलाई से पुनः लागू हुई यह व्यवस्था अब पूर्ण रूप से सक्रिय है। सेंटकॉम के अनुसार, अब तक एक दर्जन वाणिज्यिक जहाजों को दिशा बदलने को मजबूर किया गया है। मोजाम्बिक देश के झंडे वाले टैंकर एमटी लाविन को 24 जुलाई को ओमान की खाड़ी में अक्षम कर दिया गया, क्योंकि उसने चेतावनियों की अनदेखी कर घेराबंदी तोड़ने के कई प्रयास किए। कॉमोरोस देश के झंडे वाले एमटी चार्मिनार सहित दो अन्य जहाजों पर सत्यापन के लिए हेलीकाप्टर से लैंडिंग की गई।
ईरान का इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) भी सक्रिय है। उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अपने निर्धारित मार्ग का पालन न करने वाले छह जहाजों पर चेतावनी गोलीबारी की। आईआरजीसी का दावा है कि जलडमरूमध्य पर उसका पूर्ण नियंत्रण है और कुछ दिनों में यातायात लगभग शून्य रह गया। दोनों पक्ष उच्च सतर्कता पर हैं।
इस टकराव ने शिपिंग बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि कर दी है तथा कच्चे तेल की कीमतें 96-98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। ओमान की मध्यस्थता में वार्ता जारी है, पर समुद्री क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ है।
रणनीतिक दृष्टि से यह घेराबंदी ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री नियंत्रण की प्रतिस्पर्धा को रेखांकित करती है। हॉर्मुज विश्व के लगभग पांचवें हिस्से के तेल परिवहन का मार्ग है। किसी भी अनियंत्रित घटना से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका अपनी नौसैनिक क्षमता से दबाव बनाए हुए है, जबकि ईरान जलडमरूमध्य को रणनीतिक दबाव का साधन बना रहा है। दोनों पक्षों को संयम बरतना होगा, अन्यथा क्षेत्रीय स्थिरता और आगे प्रभावित हो सकती है।


