भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की तीन दिवसीय रूस यात्रा हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह यात्रा 2018 के बाद किसी भारतीय थलसेना प्रमुख की रूस की पहली आधिकारिक यात्रा थी और इसने दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत किया।
मास्को में जनरल सेठ ने दोनों देशों की क्षमता विकास करने तथा व्यावसायिक आदान-प्रदान करने पर विस्तृत चर्चा की। इसके बाद उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग स्थित मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी एकेडमी का दौरा किया। यहां संकाय सदस्यों के साथ आर्टिलरी के प्रशिक्षण तरीकों तथा आधुनिकीकरण पर गहन संवाद हुआ। यह संस्थागत स्तर का आदान-प्रदान दोनों सेनाओं के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के साझाकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बना।
यात्रा का सबसे प्रतीकात्मक क्षण पीटर एंड पॉल किले में ऐतिहासिक तोप चलाने का रहा। रूसी अधिकारियों के साथ हरे रंग की आर्टिलरी की तोप और चांदी के खरगोश की मूर्ति के पास खड़े होकर जनरल सेठ ने पारंपरिक तोप दागी। यह सम्मान न केवल सैन्य कूटनीति का प्रतीक था, बल्कि ऐतिहासिक संबंधों की निरंतरता को भी रेखांकित करता है।
रणनीतिक दृष्टि से यह दौरा महत्वपूर्ण है। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग केवल हथियार आपूर्ति तक सीमित नहीं है। यह प्रशिक्षण, संयुक्त क्षमता निर्माण और व्यावसायिक सैन्य मिलिट्री इन्फोर्मेशन को भी शामिल करता है। वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में ऐसे संस्थागत संपर्क दोनों देशों की सामरिक स्वायत्तता को बल देते हैं।
जनरल सेठ की यह यात्रा सैन्य कूटनीति की परिपक्वता को दर्शाती है। यह स्पष्ट करती है कि भारत-रूस रक्षा साझेदारी समय की कसौटी पर खरी उतर रही है और भविष्य में और अधिक गहन सहयोग की दिशा में अग्रसर है।


