ज्योतिषाचार्य श्री विनोद जैन (प्रभु), इंदौर
ॐ अंगारकाय नमः। ॐ मंगलनाथ नमो। ॐ गुरुदेव नमः।
कर्क राशि में मंगल का प्रवेश
वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार मंगल 18 सितंबर 2026 को शाम लगभग 4:35 बजे कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं। कर्क मंगल की नीच राशि मानी जाती है। मंगल 18 से 24 सितंबर तक पुनर्वसु, 24 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पुष्य तथा 17 अक्टूबर से 12 नवंबर तक अश्लेषा नक्षत्र में रहेंगे। 12 नवंबर की रात मंगल कर्क से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। उपलब्ध ज्योतिषीय गणनाओं में भी यही प्रमुख गोचर क्रम सामने आता है।
नीच मंगल के साथ उच्च गुरु
इस गोचर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कर्क राशि में मंगल के साथ गुरु भी स्थित हैं। गुरु कर्क राशि में उच्च के माने जाते हैं। इसलिए मंगल की नीचता के बीच गुरु की स्थिति उसके प्रतिकूल प्रभावों को कम करने वाली मानी जा रही है। ज्योतिष में ऐसी परिस्थितियों को नीचभंग की स्थिति से जोड़ा जाता है, हालांकि पूर्ण नीचभंग राजयोग का निर्णय जन्मकुंडली की अन्य स्थितियों पर भी निर्भर करता है। मंगल के कर्क में होने को लेकर ज्योतिषीय साहित्य में भी नीचभंग की अवधारणा को महत्वपूर्ण माना गया है।
31 अक्टूबर के बाद बदलेगा समीकरण
31 अक्टूबर को गुरु कर्क राशि छोड़कर सिंह में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 12 नवंबर तक मंगल कर्क में अकेला रहेगा। इसलिए ज्योतिषीय दृष्टि से 1 से 12 नवंबर के बीच मंगल की नीच स्थिति अपेक्षाकृत अधिक प्रभावशाली मानी जा सकती है। इस दौरान जल्दबाजी, विवाद, दुर्घटना, अग्नि, तकनीकी व्यवधान और तनावपूर्ण परिस्थितियों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। गुरु का सिंह प्रवेश 31 अक्टूबर 2026 को होने की गणना उपलब्ध स्रोतों से भी पुष्ट होती है।
राहु-मंगल का षडाष्टक संबंध
इस अवधि में राहु कुंभ राशि में धनिष्ठा नक्षत्र में है। धनिष्ठा मंगल का नक्षत्र है। कर्कस्थ मंगल और कुंभस्थ राहु के बीच राशि संबंध को ज्योतिष में षडाष्टक संबंध के रूप में देखा जाता है। इससे अचानक घटनाओं, अस्थिरता, जोखिम लेने की प्रवृत्ति और परिस्थितियों में तेजी से बदलाव के संकेत माने जाते हैं। पंचांग गणना के अनुसार राहु अगस्त से धनिष्ठा में है और 3 अक्टूबर को धनिष्ठा के तीसरे चरण में प्रवेश करता है।
बाजार में उतार-चढ़ाव के संकेत
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से मंगल, राहु और वक्री ग्रहों की संयुक्त स्थिति को वित्तीय बाजार में अस्थिरता का संकेत माना जा रहा है। अक्टूबर-नवंबर में शुक्र और बुध के वक्री होने की अवधि भी इस गणना को अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। उपलब्ध खगोलीय गणना में शुक्र के 3 अक्टूबर और बुध के 24 अक्टूबर के आसपास वक्री होने की स्थिति दर्ज है।
इस आधार पर ज्योतिषीय आकलन में सोना-चांदी, रुई-कपास, तिल-तेल, नमक, रंग-रसायन तथा कुछ कमोडिटी में तेजी-मंदी के दौर की संभावना जताई जा रही है। हालांकि ये बाजार संबंधी ज्योतिषीय संकेत हैं, इन्हें निश्चित आर्थिक भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।
विश्व परिस्थितियों पर प्रभाव
18 सितंबर से 31 अक्टूबर तक उच्च गुरु के साथ नीच मंगल की युति एक ओर मंगल की उग्रता को संतुलित करने का संकेत देती है, वहीं राहु की स्थिति वैश्विक स्तर पर अचानक घटनाक्रम और अनिश्चितता का संकेत मानी जा रही है। 31 अक्टूबर के बाद मंगल के अकेले नीच स्थिति में रहने से 1 से 12 नवंबर का समय विशेष सावधानी का माना जा रहा है। ज्योतिषीय मतानुसार इस दौरान अग्निकांड, दुर्घटनाओं, हिंसक घटनाओं, तकनीकी व्यवधान और रोग-संक्रमण जैसी स्थितियों को लेकर सतर्कता उचित रहेगी।
मंगल शांति के उपाय
मंगलवार को हनुमानजी को चोला अर्पित करना, “ॐ अं अंगारकाय नमः” मंत्र का जाप करना तथा सामर्थ्य के अनुसार तांबे का दान करना मंगल संबंधी पारंपरिक उपाय माने गए हैं। इन उपायों का उद्देश्य ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मंगल की उग्र ऊर्जा को संतुलित करना है।


