भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के स्वर्णिम जयंती वर्ष 2027 की ओर बढ़ते कदमों के बीच रक्षा मंत्रालय ने दो ऐतिहासिक नीतिगत सुधारों की घोषणा की है। ये सुधार न केवल संस्था की कार्यशैली को आधुनिक बनाते हैं, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा और मानवीय संवेदनशीलता दोनों को मजबूत करते हैं।
पहला सुधार नारी शक्ति को समर्पित है। अब आईसीजी में महिला अधिकारियों की भर्ती, प्रशिक्षण और स्थायी नियुक्ति पूरी तरह लिंग-तटस्थ ढांचे पर आधारित होगी। यह निर्णय समान अवसर के सिद्धांत को व्यवहार में उतारता है और तटरक्षक बल को अधिक समावेशी तथा सक्षम बनाता है। समुद्री डोमेन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका वैश्विक प्रवृत्ति है; भारत इस दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा रहा है।
दूसरा सुधार और भी महत्वपूर्ण है। समुद्र में ड्यूटी के दौरान लापता होने वाले जवानों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि और सहायता प्रक्रिया को सरल तथा तीव्र किया गया है। समुद्री वातावरण की अनिश्चितता को देखते हुए यह कदम परिवारों के प्रति राष्ट्र के आभार और संवेदनशीलता का जीवंत प्रमाण है। जो जवान हमारी समुद्री सीमाओं की रक्षा में जान की बाजी लगाते हैं, उनके परिजनों को समय पर और सम्मानजनक सहायता मिलना राष्ट्रीय कर्तव्य है।
भारत की 7500 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र को देखते हुए आईसीजी की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक हो गई है। तस्करी, अवैध मत्स्यन, समुद्री आतंकवाद और आपदा राहत जैसे चुनौतियों का सामना करने के लिए एक सक्रिय तथा आधुनिक तटरक्षक नीति अपरिहार्य है। ये दोनों सुधार उसी दिशा में ठोस शुरुआत हैं।
राष्ट्र अब उन परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है जो समुद्री सीमा की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करते हैं। स्वर्णिम जयंती की ओर बढ़ते आईसीजी को और अधिक सशक्त, समावेशी तथा संवेदनशील बनाने का यह प्रयास भारत की समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाई देगा।


