ईरान की अमेरिकी नाकाबंदी- कितना जरुरी है अमरीका का यह एक्शन?

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के 3 अगस्त के आंकड़ों के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी लागू करते हुए अमेरिकी बलों ने 44 वाणिज्यिक जहाजों को रास्ता बदलने के लिए बाध्य किया, दो को अक्षम किया और दो पर चढ़ाई की। नौसेना के जहाजों द्वारा प्रसारित चेतावनी संदेशों के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैल गईं, जो ऑपरेशन के पैमाने को रेखांकित करते हैं। यह नाकाबंदी जुलाई में फिर से शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले यातायात को रोकना है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए खुला रखने का दावा किया जा रहा है।

ईरान की प्रतिक्रिया तीखी रही। विदेश मंत्रालय ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन और आक्रामकता का कृत्य करार दिया। तेहरान ने जून के युद्ध-समाप्ति समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आत्मरक्षा के अंतर्निहित अधिकार का इस्तेमाल करने की कसम खाई। ईरानी अधिकारी इसे आर्थिक दबाव और क्षेत्रीय प्रभुत्व का प्रयास मानते हैं।

इस नाकाबंदी का प्रभाव बहुआयामी है। यह ईरान की तेल निर्यात क्षमता पर दबाव डालकर राजस्व में कटौती कर रहा है, जो शासन पर आर्थिक दबाव का प्रमुख साधन है। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ सकती है, क्योंकि होर्मुज से गुजरने वाले तेल व्यापार पर असर पड़ने का खतरा बना रहता है। ऑनलाइन चर्चाओं में इसे मजबूत निवारक कदम मानने वाले और जोखिम बढ़ाने वाला बताने वाले दोनों पक्ष सक्रिय हैं।

जानकारों का मानना है कि रणनीतिक दृष्टि से यह ऑपरेशन अमेरिका की समुद्री शक्ति का प्रदर्शन है, लेकिन यह क्षेत्र में तनाव बढ़ाने और अप्रत्याशित घटनाओं का खतरा भी पैदा करता है। कूटनीतिक समाधान ही दीर्घकालिक स्थिरता का मार्ग है। पर इस विषय को दुनिया भर को इस तरह से भी समझना चाहिए कि ईरान ने भारत समेत कई देशों की ऑइल सप्लाई को बंद/बाधित करने का जो घृणित कार्य किया था, उसका हिसाब ईरान से कौन मांगेगा। भारत के तो सिर्फ जहां ही नहीं रोके गए, बल्कि कई क्रू सदस्यों की ईरान के हमलों में मौत भी हुई है। इसलिए ईरान ने जो किया है, उसी का हिसाब उसका पूरा हो रहा है।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families