भारतीय सशस्त्र बलों के उच्च नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव के साथ लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने आज तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। वे जनरल अनिल चौहान का स्थान ले रहे हैं। इसी दौरान एडमिरल कृष्णा स्वामिनाथन ने एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी से 27वें नौसेना प्रमुख (चीफ ऑफ नेवल स्टाफ) का पदभार ग्रहण किया। राष्ट्रधानी में आयोजित इन दोनों समारोहों ने भारत की सैन्य एकीकरण और आधुनिकीकरण की दिशा में निरंतर प्रगति को रेखांकित किया।
लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि, जिनके पास पाकिस्तान और चीन पर गहन विशेषज्ञता सहित चार दशकों से अधिक की विशिष्ट सेवा का अनुभव है, को त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। अपने प्रथम संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘JAI’ विजन, जॉइंटनेस (संयुक्तता), आत्मनिर्भरता और इनोवेशन, के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘सम्पूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण’ (Whole of Nation Approach) पर बल देते हुए थिएटराइजेशन की प्रक्रिया को तेज करने और त्रि-सेवा समन्वय को और मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किया।
इसी समय, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एडमिरल कृष्णा स्वामिनाथन ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि चढ़ाई। आईएनएस विक्रमादित्य के पूर्व कमांडर स्वामिनाथन ने क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच भारतीय नौसेना को और अधिक सशक्त बनाने का वादा किया। उन्होंने 2025 में संचालित ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया, जिसमें भारतीय नौसेना ने पाकिस्तानी नौसेना को उसके बंदरगाहों तक सीमित रखकर निर्णायक परिचालन तत्परता का प्रदर्शन किया था।
दोनों नेताओं ने सैनिक कल्याण, स्वदेशी रक्षा उद्योग के साथ साझेदारी के माध्यम से आधुनिकीकरण और त्रि-सेवा एकता पर जोर दिया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये नियुक्तियां एकीकृत थिएटर कमांड्स और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में भारत की दीर्घकालिक रणनीति को आगे बढ़ाएंगी।
भारत जब वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में अग्रसर है, तब नए नेतृत्व से अपेक्षा की जा रही है कि वे सैन्य तैयारियों, युद्धक कौशलों में नवाचार और तीनों सेनाओं के बीच निर्बाध समन्वय को प्राथमिकता देंगे। आगामी महीनों में इन सुधारों पर ठोस प्रगति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।


