भारतीय सेना की 50वीं स्वतंत्र पैराशूट ब्रिगेड, जिसे गौरवशाली नाम “शत्रुजीत ब्रिगेड” से नवाजा गया है, ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय विशेष हेलीबोर्न ऑपरेशंस (SHBO) अभ्यास सफलतापूर्वक सम्पन्न किया। यह अभ्यास एक जटिल शहरी बंधकों को आतंकियों से छुड़वाने पर केंद्रित था, जो आधुनिक आतंकवाद के विकट चुनौतियों के लिए सेना की परिचालन तैयारियों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अभ्यास में पैराट्रूपर्स ने हेलीकॉप्टर से सामरिक मूवमेंट की विविध तकनीकों का अभ्यास किया, जिसमें स्लिदरिंग, STIE (Special Tactics Insertion/Extraction) तथा लो-होवर ड्रिल्स शामिल थे। इसके बाद छतों पर सटीक उतराई और गतिशील क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) कक्ष हस्तक्षेप का प्रदर्शन किया गया। पूरी कार्रवाई में वायु-स्थल एकीकरण, गति, समन्वय तथा सामूहिक कार्यक्षमता का अद्भुत मेल देखने को मिला। सैनिकों ने वास्तविक परिचालन स्थितियों की नकल करते हुए, उच्च जोखिम वाले आतंकवाद-रोधी मिशनों के लिए अपनी क्षमताओं को निखारा।
रणनीतिक दृष्टि से यह अभ्यास अत्यंत प्रासंगिक है। आज के युग में आतंकवादी संगठन शहरी क्षेत्रों को अपना अड्डा बनाकर बंधक संकट पैदा करते हैं, जिससे नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा दोनों दांव पर लग जाती है। शत्रुजीत ब्रिगेड का यह प्रशिक्षण न केवल ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि ‘नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर’ और संयुक्त बल एकीकरण की अवधारणा को भी मजबूत करता है। यह भारतीय सेना की ‘काउंटर-टेररिज्म डॉक्ट्रिन’ का जीवंत उदाहरण है, जो पारंपरिक युद्ध से हटकर असममित खतरों पर केंद्रित है।
सूर्या कमान के अंतर्गत आयोजित इस अभ्यास ने एक बार फिर सिद्ध किया कि भारतीय पैराट्रूपर्स विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, अत्याधुनिक उपकरणों और अटूट समर्पण के बल पर किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।
राष्ट्र की सुरक्षा की रीढ़ बने इन वीर सैनिकों का यह अथक प्रयास ‘ट्रेन हार्ड, फाइट ईजी’ की नीति को मूर्त रूप देता है।


