सेंदड़ा (ब्यावर)। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर ग्राम धोलिया (सेंदड़ा) के वीर सपूत मोहन सिंह पुत्र भोज सिंह का योगदान क्षेत्रवासियों के लिए गर्व का विषय है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय थल सेना की आर्टिलरी कोर में हवलदार के पद पर तैनात रहते हुए उन्होंने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में शत्रु के विरुद्ध साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ युद्ध में भाग लिया। भारतीय सेना की ऐतिहासिक युद्ध विजय के बाद वे सकुशल अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए लौटे।
कारगिल युद्ध भारत के सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक है। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अद्वितीय पराक्रम का प्रदर्शन कर दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर किया। हवलदार मोहन सिंह भी उन वीर सैनिकों में शामिल रहे जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।
लगभग दो दशकों से अधिक समय तक भारतीय सेना की सेवा करने के बाद वर्ष 2005 में हवलदार मोहन सिंह सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे युवाओं को देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते रहे हैं।
मोहन सिंह का परिवार भी देशसेवा की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। उनके बड़े भाई स्वर्गीय हवलदार पन्ना सिंह भी भारतीय थल सेना में सेवाएं दे चुके थे। वर्ष 1987 में ऑपरेशन पवन के तहत भारतीय शांति सेना (IPKF) के सदस्य के रूप में उन्होंने श्रीलंका में शांति स्थापना अभियान में भाग लिया और अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन किया। परिवार की यह सैन्य विरासत आज भी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
कारगिल विजय दिवस पर ग्राम धोलिया सहित पूरे क्षेत्र के लोगों ने कारगिल योद्धा मोहन सिंह और स्वर्गीय हवलदार पन्ना सिंह के राष्ट्रसेवा, साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि ऐसे वीर सपूतों के कारण ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। क्षेत्रवासियों ने दोनों सैनिकों के योगदान को स्मरण करते हुए नई पीढ़ी से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।


