भारतीय सेना के नए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने अपने कार्यभार संभालने के बाद नार्थ-ईस्ट की अपनी पहली महत्वपूर्ण यात्रा की। स्पीयर कॉर्प्स (Spear Corps) का दौरा करते हुए उन्होंने वहां के ऑपरेशनल एनवायरनमेंट पर विस्तृत ब्रिफिंग ली और युद्ध-तैयारी को और मजबूत करने के उपायों की समीक्षा की। साथ ही, उन्होंने भारतीय सेना तथा असम राइफल्स की सामुदायिक आउटरीच पहलों का जायजा लिया, जो क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
जनरल सेठ ने सभी रैंकों की व्यावसायिकता, समर्पण और उच्च परिचालन मानकों की सराहना की। उन्होंने सैनिकों से आह्वान किया कि वे निरंतर सतर्क, चुस्त और भविष्योन्मुखी बने रहें, ताकि क्षेत्र की बदलती सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी मुकाबला किया जा सके। यह यात्रा मात्र एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्व को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता सूची में शीर्ष स्थान देने का स्पष्ट संदेश है।
उत्तर-पूर्व भारत की रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। चीन, म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान की सीमाओं से घिरा यह क्षेत्र ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का प्रवेश द्वार है। यहाँ की भौगोलिक संरचना, विविध सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक संसाधन न केवल रक्षा की दृष्टि से, बल्कि आर्थिक संपर्क और क्षेत्रीय एकीकरण के लिए भी निर्णायक हैं। चीन की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाएं, सीमा विवाद और म्यांमार से आने वाली अस्थिरता इस क्षेत्र को बहुआयामी चुनौतियों का केंद्र बनाती हैं। इसके अलावा, आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से भी यहां की शांति बाकी देश की एकता के लिए अनिवार्य है।
जनरल सेठ की यात्रा इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना पारंपरिक युद्ध-तैयारी के साथ-साथ ‘दिल जीतने’ की रणनीति पर भी जोर दे रही है। उन्होंने कहा, “स्थानीय समुदायों के साथ मजबूत संबंध विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन सुनिश्चित करते हैं। भविष्य में ड्रोन, साइबर और हाइब्रिड खतरे बढ़ने वाले हैं, ऐसे में सेना की चुस्ती और नागरिक-सेना समन्वय ही हमारी सबसे बड़ी ताकत होगी।”
उत्तर-पूर्व की सुरक्षा सुनिश्चित करना मात्र सैन्य अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का अभिन्न अंग है। जनरल सेठ का यह दौरा उसी दिशा में एक सशक्त कदम है।


