लेबनान-इजरायल सीमा पर जारी तनाव के बीच इजरायली रक्षा बल (IDF) ने एक बार फिर भूमिगत युद्ध की जटिल चुनौती को अपने पक्ष में मोड़ने की मिसाल पेश की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अली ताहेर रिज के नीचे फैले एक विस्तृत सुरंग परिसर में लगभग 40 हिजबुल्लाह आतंकवादी फंस गए हैं। IDF ने सभी मुख्य प्रवेश द्वारों को सील कर दिया है और सुरक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ दिनों में ही उनके पास भोजन, पानी और गोला-बारूद खत्म हो जाएगा। यह परिसर एक किलोमीटर से अधिक लंबा बताया जा रहा है, जिसमें कमांड सेंटर, हथियार डिपो और रॉकेट लॉन्च सुविधाएं शामिल हैं।
यह घटना हिजबुल्लाह की रणनीति की कमजोरी को उजागर करती है। ईरान समर्थित इस संगठन ने वर्षों से दक्षिणी लेबनान में एक विशाल सुरंग नेटवर्क विकसित किया है, जिसे ‘भूमिगत शहर’ की संज्ञा दी जाती है। इन सुरंगों का उद्देश्य इजरायली हमलों से बचना, अचानक घुसपैठ करना और लंबे समय तक युद्ध छेड़ना था। लेकिन IDF की खुफिया जानकारी, ड्रोन निगरानी और सटीक इंजीनियरिंग अभियानों ने इस रणनीति को निष्प्रभावी बना दिया है। सुरंगों को सील करने की रणनीति न केवल दुश्मन को बिना बड़े नुकसान के बेअसर करती है, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव भी बढ़ाती है।
रणनीतिक दृष्टि से यह इजरायल की ‘डिनियल ऑपरेशंस’ की परिपक्वता दर्शाता है। हमास के खिलाफ गाजा में भी IDF ने इसी तरह की टनल वारफेयर का सामना किया था। जहां पारंपरिक सेनाएं खुले मैदान में लड़ती हैं, वहीं आधुनिक असममित युद्ध में दुश्मन भूमिगत छिपकर लाभ उठाने की कोशिश करता है। इजरायल की सफलता का राज उसकी स्पष्ट प्राथमिकता है, राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी भी कीमत पर सुनिश्चित करना। मानवाधिकारों की बहस से ऊपर उठकर IDF ने सैन्य ओब्जेक्टिव्स को प्राथमिकता दी है, जो लंबे संघर्ष में जीत का आधार बनती है।
इस घटना से भारत जैसे देशों को भी सीख मिलनी चाहिए। सीमा पार आतंकवाद और भूमिगत बुनियादी ढांचे की चुनौती बढ़ रही है। हमारी सेनाओं को खुफिया-आधारित पूर्व-निरीक्षण, इंजीनियरिंग क्षमताओं और तेज प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
अली ताहेर की यह सुरंग न केवल हिजबुल्लाह के लिए फंदा साबित हो रही है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा की बदलती प्रकृति का प्रतीक भी है। इजरायल की यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक, दृढ़ता और स्पष्ट रणनीति ही निर्णायक होती है।


