स्वदेशी लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर- हिमालय से रेगिस्तान तक सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक

Dr Rajesh Jauhri
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drrajesh
Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle &...
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भारतीय सशस्त्र बलों को दुनिया के सबसे कठिन भूभागों, उच्च हिमालय से लेकर रेगिस्तान तक, में संचालन करना पड़ता है। इन्हीं चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर रहा है हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का स्वदेशी तीन टन श्रेणी का लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (LUH)। हाल ही में HAL द्वारा प्रदर्शित इस प्लेटफॉर्म ने एक बार फिर साबित किया कि ‘मेड इन इंडिया’ अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि सामरिक क्षमता का जबरदस्त उदाहरण भी है।

LUH को उपयोगिता, टोही गतिविधियां, घायलों के इवैक्युएशन और सैनिक परिवहन जैसे बहुआयामी मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। हाल के संरचनात्मक अनुकूलन से इसमें कंपन (वाइब्रेशन) को कुल मिलाकर 30-40 प्रतिशत तथा महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगभग 50 प्रतिशत तक कम किया गया है। इससे न केवल विमान की विश्वसनीयता बढ़ी है, बल्कि 6,500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले मिशनों में पायलट थकान भी काफी हद तक कम हुई है। साफरान आर्डिन इंजन से लैस यह हेलीकॉप्टर 500 किलोग्राम पेलोड वहन करने में सक्षम है और रखरखाव की आवश्यकता भी अपेक्षाकृत कम रखता है।

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह द्वारा हाल ही में इस हेलीकॉप्टर में सॉर्टी लेना इसकी परिपक्वता का प्रमाण है। लगभग 187 यूनिटों की योजना और सशस्त्र संस्करणों की संभावना आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह पुराने चीता-चेतक बेड़े को प्रतिस्थापित करने के साथ-साथ उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रसद और गतिशीलता को मजबूत करेगा।

LUH न केवल भारतीय सेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करता है, बल्कि निर्यात क्षमता भी रखता है। ‘भारत के लिए निर्मित, विश्व के लिए तैयार’ (Make for India, Ready for World), यह नारा अब वास्तविकता बनता जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत की इस यात्रा में LUH जैसे प्लेटफॉर्म सामरिक स्वायत्तता के आधार स्तंभ साबित होंगे।

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Dr Rajesh Jauhri is a Journalist with experience of 25 years in Indian and foreign media, Social Scientist, Accomplished Author, Political & Strategic Analyst, Rifle & Pistol Shooter, Orator, Thinker and Educationist. He holds Ph.D. degree on “Impact of colonial heritage on Indian police”. He is a national-level sportsperson, won titles in badminton, rifle and pistol shooting and at state-level in archery. Runs NGO for social, economic uplift of tribal communities in MP and two decades back, established a school in Kodariya village of Indore to provide education and moral values to children belonging to tribal, minority families