भारतीय सेना की टुकड़ी भारत-कंबोडिया द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘CINBAX-II 2026’ में भाग लेने के लिए कंबोडिया रवाना हो गई है। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारतीय सेना के अतिरिक्त जनसंपर्क महानिदेशालय (ADGPI) के अनुसार, यह संयुक्त सैन्य अभ्यास 4 मई से 17 मई 2026 तक कंबोडिया के कंम्पोंग स्प्यू प्रांत स्थित ‘तेचो सेन फ्नोम थॉम म्रियास प्रोव रॉयल कंबोडियन एयर फोर्स ट्रेनिंग सेंटर’ (कैंप बेसिल) में आयोजित किया जाएगा।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य कंपनी स्तर पर संयुक्त प्रशिक्षण है, जिसमें ‘सब-कन्वेंशनल वातावरण’ में अभियान संचालन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसका अर्थ उन परिस्थितियों से है, जहां सेना को आतंकवाद-रोधी अभियान, विद्रोह नियंत्रण, शांति स्थापना मिशन और सीमित संघर्ष जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आज के बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में ऐसे अभ्यासों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। आधुनिक सेनाओं को अब केवल पारंपरिक युद्ध ही नहीं, बल्कि आतंकवाद, मानवीय संकट, प्राकृतिक आपदा और सीमापार सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए भी तैयार रहना पड़ता है।
भारत के लिए यह अभ्यास उसकी ‘एक्ट ईस्ट नीति’ का हिस्सा है, जिसके तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, कूटनीतिक और सामरिक संबंध मजबूत किए जा रहे हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बढ़ते रणनीतिक महत्व को देखते हुए कंबोडिया इस नीति में अहम स्थान रखता है।
कंबोडिया के लिए भारत के साथ सैन्य सहयोग प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान, रणनीतिक अनुभव और क्षमता निर्माण का अवसर प्रदान करता है। भारतीय सेना विविध परिस्थितियों में लंबे अनुभव के कारण मित्र देशों के साथ अपनी विशेषज्ञता साझा करती रही है।
ऐसे संयुक्त अभ्यासों का सबसे बड़ा लाभ ‘इंटरऑपरेबिलिटी’ है, यानी दोनों सेनाओं की साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता। इससे संयुक्त अभियानों, शांति मिशनों या आपदा राहत कार्यों में समन्वय बेहतर होता है।
CINBAX-II यह दर्शाता है कि भारत और कंबोडिया दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच विश्वास, तैयारी और क्षेत्रीय स्थिरता को नई दिशा देगा।


